तब्लीगी जमात : कुरान शरीफ की बातों पर होता अमल तो, भारत में विकराल नही होता कोरोना

दुनिया के अलावा भारत में भी कोरोना कोहराम मचा रहा है. सरकार ने वायरस के प्रभाव को सीमित करने के लिए लॉकडाउन किया है. लेकिन इस दौरान यदि इस्लाम की सलाह पर अमल किया जाता तो आज न तो देश के संक्रमितों में एक तिहाई तब्लीगी जमात वाले होते, न ही जमात के अमीर मौलाना साद को यूं मुंह छिपा कर भागना पड़ता. क्योंकि कुरान शरीफ की सूरा संख्या 5 में स्पष्ट कहा गया है कि जिस मुल्क में रहते हो, उसके कायदे-कानून और वहां के हुक्मरानों की बात को मानो.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हजरत निजामुद्दीन की तब्लीगी जमात में हुई गलतियों पर पर्दा डालने के लिए आज भले कुछ लोगों द्वारा कुतर्क गढ़े जा रहे हों, लेकिन कुछ ऐसे पढ़े-लिखे मुसलमान तथ्यों के साथ सामने आ रहे हैं, जो कोविड-19 जैसे खतरनाक संक्रामक रोग से बचने के लिए सरकार के निर्देशों एवं इस्लाम की शिक्षा में समानता पाते हैं. इन्हीं में से एक महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सैय्यद मुजफ्फर हुसैन कहते हैं कि जिस मज़हब की आसमानी किताब और उसके हुजूर पैगंबर मुस्तफ़ा मुहम्मद सल्लेअलाहुअलैहिवसल्लम (SAW) ने इन पाबंदियों एवं एहतियातों का जिक्र हजारों साल पहले किया था, आज 21वीं शताब्दी में विज्ञान उन्हीं का पालन करने को कह रहा है.

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वायरस से उपजी विकट परिस्थिति में इस्लाम के मानने वालों का फर्ज बनता है कि वे अपने मज़हब के बताए हुए रास्तों पर चलें एवं अपनी, समाज की एवं पूरे मुल्क के लोगों की हिफाज़त करें एवं सरकार के निर्देशों का हू-ब-हू पालन करें. वह कहते हैं कि इसके बावजूद यदि कोई कोरोना वायरस की महामारी के दौरान सरकार के निर्देशों का उल्लंघन करे, तो समाज एवं मुल्क के खिलाफ हरकतें करनेवाले ऐसे इंसान को गैरजिम्मेदार माना जाएगा.

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