जानिए दादा साहेब फाल्के अवार्ड से जुड़े रोचक तथ्य

दादा साहेब फाल्के अवार्ड की शुरू 

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार है जो कि हर साल भारत सरकार की तरफ से भारतीय सिनेमा में उसके आजीवन योगदान देने वाले लोगों को दिया जाता है. इस पुरस्कार को प्रदान करने की प्रथा दादा साहेब फाल्के के जन्म शताब्दी 1969 से शुरू हुईं. इस पुरस्कार के साथ सम्मानित व्यक्ति विशेष को 10 लाख रुपया और सुवणॅ कमल दिया जाता है. 'लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड' के रूप में दिया जाने वाला 'दादा साहेब फाल्के पुरस्कार' भारत के फ़िल्म क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है. प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति 'दादा साहेब फाल्के अकादमी' की सिफारिशों पर यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है.

पहला दादा साहेब फाल्के पुरस्कार साल 1969 में भारतीय सिनेमा की पहली अभिनेत्री देविका रानी को दिया था. पहले यह पुरुस्कार साल के अंत में दिया जाता था. सिनेमा जगत के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार में अब भारत सरकार की ओर से दस लाख रुपये नकद, स्वर्ण कमल और शॉल प्रदान किया जाता है. ‘दादा साहेब फाल्के अकादमी’ के द्वारा भी दादा साहेब फाल्के के नाम पर तीन पुरस्कार भी दिए जाते हैं, जो हैं - फाल्के रत्न अवार्ड, फाल्के कल्पतरु अवार्ड और दादा साहेब फाल्के अकेडमी अवार्ड्स. आखिरी दादा साहेब फाल्के पुरस्कार अभिनेता विनोद खन्ना को दिया है. 

 

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