नवरात्रि: कहीं गिरा था माता का मस्तक तो कहीं हृदय, जानिए 6 अनोखे शक्तिपीठों के बारे में

नवरात्रि का पर्व 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन महत्वपूर्ण शक्तिपीठ के बारे में जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए। जी दरअसल ऐसी मान्यता है कि माता रानी के 52 शक्तिपीठ हैं और इन शक्तिपीठों के दर्शन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं 6 शक्तिपीठों के बारे में।

माँ जयदुर्गा- यह झारखंड के देवघर में स्थित वैद्यनाथधाम में स्थित है। जी हाँ और कहा जाता है यहाँ माता का हृदय गिरा था। जी दरअसल यहाँ शक्ति को जय दुर्गा और भैरव को वैद्यनाथ कहा जाता है।

माँ महशिरा- जी दरअसल नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के निकट स्‍थित है यह शक्तिपीठ। इस मंदिर को गुजरेश्वरी मंदिर भी कहा जाता है। कहते हैं यहाँ माता के दोनों घुटने (जानु) गिरे थे। जी हाँ और यहाँ शक्ति को महशिरा (महामाया) और भैरव को कपाली कहते हैं। 

माँ दाक्षायणी- यह तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर के मानसा के निकट स्‍थित है। कहते हैं यहाँ एक पाषाण शिला पर माता का दायाँ हाथ गिरा था। जी हाँ और यहाँ शक्ति को दाक्षायनी और भैरव को अमर कहते हैं।

विरजाक्षेत्र - यह उड़ीसा के विराज में उत्कल में स्थित है। कहा जाता है यहाँ माता की नाभि गिरी थी। वहीं यहाँ शक्ति को विमला और भैरव को जगन्नाथ कहते हैं। 

गंडकी- यह शक्तिपीठ नेपाल में गंडकी नदी के तट पर पोखरा नामक स्थान पर स्थित है। कहा जाता है इस शक्तिपीठ को मुक्तिनाथ मंदिर भी कहते हैं। जी दरअसल यहाँ माता का मस्तक  गिरा था और यहाँ शक्ति को गण्डकी चण्डी और भैरव को चक्रपाणि कहते हैं। 

बहुला (चंडिका)- यह पश्चिम बंगाल से वर्धमान जिला से 8 किमी दूर कटुआ केतुग्राम में स्थित है। अजेय नदी तट पर स्थित बाहुल स्थान पर पीठ बनी हुई है। कहा जाता है यहाँ माता का बायाँ हाथ गिरा था और यहाँ शक्ति को देवी बाहुला और भैरव को भीरुक कहते हैं।

नवरात्रि: क्या है माता रानी के 52 शक्तिपीठ के नाम और कहाँ है स्थित, जानिए यहाँ सब कुछ

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