कई काम बाकी है फिर कैसे बनेगा इंदौर शहर स्मार्ट

Aug 28 2015 05:26 AM
कई काम बाकी है फिर कैसे बनेगा इंदौर शहर स्मार्ट

इंदौर. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता के लिए नगर निगम ने अपनी और से नंबर भेज दिए हैं। निगम ने दावा किया है कि सिटी प्रोजेक्ट को लेकर जो बिंदु तय हैं, उनमें इंदौर प्रदेश में अव्वल है। बावजूद इसके अभी काफी काम बाकी है। महापौर मालिनी गौड़ के आदेश पर निगमायुक्त मनीष सिंह ने प्लान बनाया है।

इसके अनुसार महापौर, निगमायुक्त, MIC सदस्य, क्षेत्रीय पार्षद Smart city को लेकर निगम के सभी 19 जोनल कार्यालयों पर बैठकें करेंगे। इसमें प्रबुद्ध नागरिकों को भी बुलाया जाएगा। उन्हें smart city project का प्रेजेंटेशन और फायदा बताया जाएगा। इस काम में उनसे सहयोग भी मांगा जाएगा। निगम अपने स्तर पर भी E-Governance को बढ़ाने और पानी, शौचालय, हरियाली के लिए काम करेगा। इसी महीने से निगम के Portal पर E-News letter भी डाला जाएगा।

ये काम करना होंगे स्मार्ट सिटी के लिए

- अच्छी सड़कें।

- स्वच्छ और पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी 24 घंटे मिले।

- 24 घंटे बिजली सप्लाय हो।

- सीवरेज व बारिश के पानी की निकासी।

गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर उपयोग करना।

- बेहतर कचरा प्रबंधन के लिए डोर-टू-डोर कलेक्शन व 100 प्रतिशत निपटान।

- वृक्षारोपण और बगीचों का विकास।

- लोक परिवहन की उचित व्यवस्था व ट्रैफिक मैनेजमेंट।

- अफोर्डेबल हाउसिंग।

- ई-गवर्नेंस।

चुनौतियां

Smart City बनने की राह पर चल रहे इंदौर शहर के सामने कई बड़ी चुनौतियां कड़ी। Smart City में उल्लेखित सीवरेज व बारिश के पानी की निकासी और गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर उपयोग करने की बात करें, तो आधे से ज्यादा शहर में 150 साल पुरानी होलकर कालीन सीवरेज लाइन बिछी है। इसे बदलने के लिए ही लगभग 450 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर उपयोग तो तब होगा, जब गंदे नालों को कान्ह नदी में मिलने से रोका जाएगा और इसको साफ किया जाएगा। शहर के बीच से गुजरने वाला BRTS और जवाहर मार्ग, MG रोड़ जैसी भीड़ भरी सड़कों पर यातायात को सुचारु रूप रखना प्रशासन के लिए दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है।