दो महीने के बाद भी कोरोना के कहर से बाहर नहीं आ पा रहा है यह क्षेत्र

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले इंदौर में मिल रहे है. वहीं, शहर में 24 मार्च को कोरोना संक्रमण का पहला मरीज जिस रानीपुरा इलाके में मिला था, वह इलाका अब तक संक्रमण की मार झेल रहा है. यह दो महीने बाद भी वायरस के संक्रमण से नहीं उबर पाया है. यह दो महीने से कंटेनमेंट एरिया बना हुआ है और यहां आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध है. आइसीएमआर और शासन की गाइडलाइन के अनुसार, जिस कंटेनमेंट एरिया में 21 दिन तक कोई नया कोविड पॉजिटिव न मिले तो उस एरिया से कंटेनमेंट के प्रतिबंध हटा लिए जाते हैं. पर दुर्भाग्य की बात है कि यहां उम्मीद की किरण नजर आते-आते ओझल हो जाती है.

दरअसल, रानीपुरा और इससे जुड़े दौलतगंज व हाथीपाला कंटेनमेंट एरिया में कुल 36 पॉजिटिव केस मिले हैं. इनमें रानीपुरा में नौ, दौलतगंज में 22 और हाथीपाला में पांच केस मिले हैं. यहां लंबे वक्त तक कोई पॉजिटिव नहीं मिले थे. साथ ही प्रशासन लॉकडाउन और शारीरिक दूरी के नियमों का सख्ती से पालन करवा रहा है.  

बता दें की अब रहवासी भी इसमें अपनी तरफ से सहयोग कर रहे हैं. यह इलाका कंटेनमेंट से बाहर आने की तैयारी में था लेकिन 11 मई को अचानक तीनों इलाकों में एक-एक कोरोना पॉजिटिव केस मिल गए है. इससे रानीपुरा सहित तीनों इलाके जहां थे, वहीं आ गए. अब उनकी 21 दिन की गिनती 1 जून को पूरी होगी. यानी अब अगले आठ दिन तक यहां कोरोना का कोई पॉजिटिव मरीज नहीं मिलता है तो रानीपुरा, दौलतगंज और हाथीपाला की करीब 15 हजार की आबादी को कंटेनमेंट एरिया से मुक्ति मिल सकेगी.

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