घर लौटने के लिए बेचा एक बैल फिर कंधे पर रखकर खुद चलाई बैलगाड़ी

इंदौर. इस समय देश में लागू लॉकडाउन  और मजदूरों  के पलायन  के बीच बहुत सी ऐसी तस्वीरें और दृश्य सामने आ रहे हैं जो दिल को दहला दे रहे हैं. ऐसे में हाल ही में इंदौर में पलायन कर रहे एक मजदूर को खुद बैल के साथ गाड़ी में जुतना पड़ा. उसकी मजबूरी ये थी कि काम धंधा बंद होने के कारण घर लौटना था और घर लौटने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे.

इस कारण एक बैल वो बेच चुका था और एक बैल के सहारे गाड़ी खींची नहीं जा सकती थी. ऐसे में जो तस्वीर सामने आई है वह इंदौर के बायपास की है. जहाँ चिलचिलाती धूप और तपती दोपहरी में एक मजदूर बैल गाड़ी को खींच रहा था. वहीं गाड़ी में एक तरफ बैल जुता था और दूसरी तरफ मजदूर. इस गाड़ी पर उसकी छोटी सी गृहस्थी और परिवार लदा था. आप सभी को बता दें कि बैल के साथ खुद को जोतने वाला ये श्रमिक का नाम मनोज है और मनोज महू का रहने वाला है. वह रोजी-रोटी की तलाश में कुछ समय पहले इंदौर आ गया था और यहां उसने बैलगाड़ी खरीदी और हम्माली करना शुरू कर दिया.

लेकिन अचनाक आए इस लॉकडाउन ने सब बर्बाद कर दिया. उसके कुछ दिन तो जैसे-तैसे कट गए लेकिन धीरे-धीरे घर में रखे अनाज के दाने और जेब में रखी पाई-पाई भी ख़त्म हो गयी. उसके बाद लाचार-मजबूर होकर मनोज ने 15 हजार का बैल 5 हजार में बेच दिया. वहीं उसके बाद उसने बोरिया-बिस्तर बांधा लेकिन लौटने के लिए एक ही बैल था. इस वजह से उसने दूसरे बैल की जगह खुद को ही जोत लिया. उसने गाड़ी पर सामान और परिवार को बैठाया और भारी कदमों से घर लौट पड़ा. इस दौरान उसकी भाभी ने भी गाड़ी को खींचा.

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