आयरन लेडी को लगी थी 31 गोलियां और चढ़ाना पड़ा 88 बोतल खून

नई दिल्ली । देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री होने के बाद भी स्व. इंदिरा गांधी ने अपने कुशल नेतृत्व का परिचय दिया। उन्होंने देश हित में कुछ ऐसे निर्णय लिए जिससे देश मजबूत स्थिति में आया लेकिन उन्हें अपने कई कड़े फैसलों के चलते विरोध का सामना भी करना पड़ा। भिंडरावाले के खिलाफ चलाया गया आॅपरेशन ब्लू स्टार इसी तरह का एक फैसला था हालांकि उन्होंने इस अभियान से विद्रोह को लगभग समाप्त कर दिया था लेकिन इसकी कीमत उन्हें अपना खून बहाकर चुकानी पड़ी। यह कौन जानता था कि आयरन लेडी के नाम से पहचानी जाने वाली प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सभी के बीच से इस तरह विदा होंगी।

31 अक्टूबर 1984 के दिन उनके ही अंगरक्षक ने उन पर 31 गोलियां दाग दीं। उस पल को जो भी याद करता है उसकी आंखें इंदिरा जी के गम में नम हो जाती हैं और फिर याद आ जाता है सिख विरोधी दंगों का वह मंजर जो इंदिरा गांधी की मौत के बाद सामने आया था। इंदिरा गांधी पर उनके अंगरक्षकों ने ही गोलियां चला दी थीं। इंदिरा गांधी को उनके निजी सचिव आर के धवन और बहू सोनिया गांधी घायल हालत में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान लेकर दौड़े थे।

सोनिया की गोद में सोनिया का सिर था। इंदिरा गांधी को बचाने के लिए 88 बोतल खून चढ़ाया गया था। इंदिरा का ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव था। इंदिरा गांधी ने देश की बांगडोर कठिन समय में संभाली थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने इंदिरा के प्रशासन की सराहना की थी। उनका कहना था कि इंदिरा गांधी के जीवन में जवाहरलाल नेहरू का विशेष प्रभाव था। इंदिरा का जन्म 19 नवंबर को 1917 में हुआ था और उनकी माता का नाम कमला नेहरू था। उन्हें रवींद्रनाथ टैगोर ने प्रियदर्शिनी का नाम दिया था।

इंदिरा गांधी की याद में कांग्रेस ने निकाला मार्च

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