इन वाहनों से की जाती थी भारत की सुरक्षा

इन वाहनों से की जाती थी भारत की सुरक्षा
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आज देश की सेनाओं द्वारा महिंद्रा और टाटा मोटर्स के वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि इनके सेना में शामिल होने के पहले जोंगा नाम के इंडिया निर्मित वाहनों का उपयोग होता था। जिसे वर्ष 1969 से जबलपुर में निर्मित किया जाने लगा था। जोंगा के प्रोडक्शन को वर्ष 1999 में बंद किया जाता है तब से तकरीबन जिसके 20,000 वाहन वर्ष 2013 तक इंडियन फाॅर्स में अपनी सेवा दे रहे थे। इतने लंबे समय में भारत ने अपना स्वदेशी जेट लड़ाकू और युद्धक टैंक भी विकसित किया जा चुका है।

जानें कौन से हैं वो Personnel Carriers और क्या होता है उनका उपयोग: इंडियन फाॅर्स में सबसे पॉपुलर लोकप्रिय पर्सनेल कैरियर Maruti Gypsy है जिसे मारूति द्वारा गुरुग्राम संयंत्र में जिम्मी SJ40/410 के लॉन्ग व्हीलबेस वर्जन के आधार पर वर्ष 1985 से उत्पादन भी किया जाने लगा। यह गाड़ी अभी भी सेना द्वारा इस्तेमाल की जाती है। इस गाड़ी का उत्पादन वर्ष 1999 में बंद कर दिया गया था और अब इसका स्थान महिंद्रा की MM540 लेती हुई दखाई दे रही है। अब मारुती टाटा जिप्सी के स्थान पर रक्षा वाहनों के रूप में TATA मोटर्स की सूमो और सफारी स्टॉर्म के बख्तरबंद वर्जन की गाड़ियों को भी शामिल भी किया जा चुका है। जो जल्द ही पूरी तरह से जिप्सी का स्थान लेने वाले है। साथ ही इस बेड़े में महिंद्रा स्कॉर्पियो का बख्तरबंद वर्जन भी किया जाने वाला है।

इन वाहनों का सेना करती है इस्तेमाल:  जिनके साथ साथ इंडियन फाॅर्स द्वारा मित्सुबिशी पजेरो, फोर्स गोरखा, टाटा ज़ेनॉन और कई एटीवी (ऑल-टेरेन व्हीकल) का भी उपयोग भी किया जा रहा है। जिसमें पोलारिस स्पोर्ट्समैन 6x6, पोलारिस एमआरजेडआर, आर्कटिक कैट अल्टर्रा टीबीएक्स 700,ATV, पोलारिस रेंजर जैसे वाहन शामिल हैं। 

इन लड़ाकू विमानों का प्रयोग करती है इंडियन फाॅर्स: इस वर्ष जुलाई में, इंडियन फाॅर्स में नए लड़ाकू वाहनों का मेड-इन-इंडिया क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल (QRFV) बैज को भी शामिल किया गया है, जो कठिन इलाकों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बेहतर गति के साथ कार्य करता है। इंडियन रक्षा के इलाके में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) इसी वर्ष अप्रैल में बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों को भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उत्पादन करके इस तरह के वाहनों का निर्माण करने वाली भारत की पहली निजी क्षेत्र की वाहन निर्माता कंपनी बनी। इन वाहनों को TASL की पुणे स्थित प्लांट में DRDO और व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट स्टैब्लिशमेंट (VRDE) के साथ मिलकर 8×8 व्हीलड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (WhAP) पर डिज़ाइन और निर्मित भी किया जा रहा है।

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