राष्ट्रपति प्रणब बने शिक्षक मुखर्जी

नई दिल्ली : भारत के महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज बच्चों की क्लास ली। इस दौरान दिल्ली सरकार के सर्वोदय विद्यालय में पहुंचकर उन्होंने बच्चों से चर्चा की और बच्चों को भारत के इतिहास का पाठ पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने भारत के संविधान की रूपरेखा के बारे में बताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आखिर किस तरह से संविधान बड़े लंबे अंतराल के साथ बना। यही नहीं यह भी कहा गया कि संविधान का निर्माण करने के लिए 300 लोग बड़े जतन से लगे रहे। 

दरअसल शिक्षक दिवस के अवसर पर दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बच्चों को पढ़ाना प्रारंभ किया तो बच्चे और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी दोनों ही विषय में खो गए। इस दौरान ऐसा लगा ही नहीं कि बच्चे राष्ट्रपति प्रणब से पढ़ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन और बचपन के बारे में बताते हुए कहा कि मेरा स्कूल मेरे गांव से 5 किलोमीटर दूर था। मैं अधिक कुशाग्र छात्र नहीं था और बचपन में बहुत शरारती था।

प्रति दिन मेरी माता के पास शिकायत आती थी। उन्होंने कहा कि बचपन से ही उन्होंने बहुत मेहनत की है। मेरी ग्रेजुएशन की शिक्षा तक बिजली नहीं थी और अन्य सुविधाऐं भी नहीं थीं लेकिन मैंने मेहनत की। उन्होंने कहा कि पहले का पाठ्यक्रम और वर्तमान पाठ्यक्र काफी अलग है। इस दौरान उन्होंने भारत के इतिहास और संविधान को लेकर कहा कि भारत को मिलने वाली आज़ादी से लेकर संविधान पारित होने तक के सफर की चर्चा करते हुए कहा कि आखिर तीन साल का समय क्यों लगा।

दरअसल यह एक बहुत ही पेचिदा विषय था। इसके लिए 300 सदस्यों ने बहुत मेहनत की थी। इन लोगों ने मेहनत कर संविधान ड्राफ्ट किया। उन्होंने प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख करते हुए कहा कि सविधान के आॅब्जेक्टिव को तय करने में भी काफी काम किया गया। उन्होंने कहा कि संविधान में जस्टिस, समानता  की बात की गई। उसमें व्यक्तित्व की बात की गई लेकिन एकता का समावेश किया गया। 1757 में अंग्रेजों ने भारत पर अधिकार कर लिया था। 

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