चटगांव विद्रोह के प्रमुख और भारत के महान क्रांतिकारी, सूर्या सेन

Jan 12 2019 08:47 AM
चटगांव विद्रोह के प्रमुख और भारत के महान क्रांतिकारी, सूर्या सेन

सूर्य सेन भारत की स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रान्तिकारी थे. उन्होने इंडियन रिपब्लिकन आर्मी की स्थापना की थी और चटगांव विद्रोह का भी  सफल नेतृत्व किया था. वे नेशनल हाईस्कूल में सीनियर ग्रेजुएट शिक्षक के तौर पर भी कार्य कर चुके थे और लोग प्यार से उन्हें "मास्टर दा" कहकर सम्बोधित करते थे. 

चटगांव विद्रोह में भूमिका 

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से संबद्ध इतिहासवेत्ता एम मलिक के मुताबिक यह घटना 18 अप्रैल 1930 से शुरू होती है जब बंगाल के चटगांव में आजादी के दीवानों ने अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने के लिए इंडियन रिपब्लिकन आर्मी (आईआरए) की स्थापना की थी. आईआरए के गठन से पूरे बंगाल में क्रांति की आग भड़क उठी और 18 अप्रैल 1930 को सूर्यसेन के नेतृत्व में दर्जनों क्रांतिकारियों ने चटगांव के शस्त्रागार को लूटकर अंग्रेज शासन के खात्मे का ऐलान कर दिया. क्रांति की आग को देखकर हुकूमत के नुमाइंदे भाग निकले और चटगांव में कुछ दिन के लिए अंग्रेजी शासन का अंत हो गया.

इस घटना ने आग में घी का काम किया और बंगाल से बाहर देश के विभिन्न हिस्सों में भी स्वतंत्रता संग्राम उग्र हो उठा. इस घटना का प्रभाव कई महीनों तक रहा. पंजाब में हरिकिशन ने स्थानीय गवर्नर की हत्या की कोशिश की. दिसंबर 1930 में विनय बोस, बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता ने कलकत्ता की राइटर्स बिल्डिंग में प्रवेश किया और स्वाधीनता सेनानियों पर जुल्म ढ़हाने वाले पुलिस अधीक्षक को मौत के घाट उतार दिया. इस दौरान सूर्या सेन भेष बदलकर जगह-जगह घुमते रहे, इसी दौरान उन्होंने नेत्र सेन नामक एक आदमी के घर शरण ली, लेकिन नेत्र सेन ने लालच में आकर अंग्रेज़ों को इसकी जानकारी दे दी और अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर 12 जनवरी 1934 को मेदिनीपुर जेल में फांसी दे दी.

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