भारतीय बैंकों पर कर्ज का बोझ 13 लाख करोड़ के पार

आजकल देशभर में बैंकों को लेकर चर्चा काफी गर्म है. खासतौर पर बैंकों के डूबे कर्ज को लेकर, जिसमें भारत धीरे-धीरे अव्वल होता जा रहा है. हममें से काफी कम लोग जानते होंगे कि डूबे कर्ज के मामले में भारत का नंबर तीसरे पायदान पर आता है. हाल ही में कोटक महिंद्रा बैंक के वाइस चेयरमैन उदय कोटक ने इस बात की जानकारी दी थी. कोटक के मुताबिक, भारतीय बैंकों की डूबे कर्ज की राशि 14 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पहुँच सकती है, जो आर.बी.आई. के हालिया दस्तावेज के मुताबिक कुल लोन एसैट्स के 20 प्रतिशत के बराबर है.

गौरतलब है कि पंजाब नैशनल बैंक में हुए 13,000 करोड़ रुपए के घोटाले और भारतीय अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए कोटक ने कहा कि, पंजाब नैशनल बैंक का घोटाला सामने आने के बाद ऋण की समूची वृद्धि में निजी क्षेत्र के बैंकों का योगदान रहा है. इस दौरान उन्होंने कहा कि, 'अगले 4 साल में निजी क्षेत्र के बैंकों का ऋण बाजार में करीब 50 प्रतिशत का हिस्सा हो जाएगा, जो अभी 30 प्रतिशत है.'

एस.एम.ई. पर है काफी कर्ज

छोटे एवं मध्यम कारोबारों (एस.एम.ई.) भी कर्ज में डूबा हुआ है. इस विषय पर बात करते हुए कोटक ने कहा कि, 'इस सैक्टर पर यह दबाव नोटबंदी और जी.एस.टी. के कारण पड़ा. कामकाज को इंसान के बजाय तकनीक से पूरा करने की प्रक्रिया में कई प्रकार की दिक्कतें आ सकती हैं.' कोटक ने कहा कि जब हम बदलाव के दौर में होते हैं तो बीच का रास्ता काफी खतरनाक होता है. वहीं इलैक्ट्रोनिक दौर के बदलाव में हमें सावधानी से आगे बढ़ना होगा.

 

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