अमेरिकी धार्मिक संस्था की रिपोर्ट पर भारत का जवाब, हमें किसी से सर्टिफिकेट नहीं चाहिए

नई दिल्ली। भारत सरकार ने अमेरिका की धार्मिक संस्था की रिपोर्ट का जवाब देते हुए कहा है कि हम इस रिपोर्ट पर कोई संज्ञान नहीं ले रहे है। विदेश मंत्रालय द्वारा एक बयान जारी कर कहा गया कि अमेरिकी संस्था ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि उसे भारत, भारतीय संविधान और भारतीय समाज की समझ नहीं है।

बयान में यह भी कहा गया कि भारत एक बहुलतावादी समाज है, जो मजबूत लोकतंत्र के सिद्धांतो पर खड़ा है। भारतीय संविधान देश के सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। यह अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार भी है।

विदेश मंत्रालय के बयान में अमेरिकी आयोग USCIRF की भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाने पर ही प्रश्न खड़ा कर दिया है। इस रिपोर्ट में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह व साक्षी महाराज का भी नाम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि धार्मिक नेताओं व अधिकारियों ने समुदाय के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की।

इसके लिए भारत सरकार ने उन्हें फटकार भी लगाई। कमीशन का कहना है कि वो साल 2016 में होने वाली घटनाओं पर भी नजर रखेगा। यूएससीआईआरएफ ने अमेरिका की सरकार को सलाह दी है कि वो भारत के साथ धार्मिक स्वतंत्रता और नीतियों के मुद्दे पर बात करे। यह रिपोर्ट पीएम मोदी के वॉशिंगटन दौरे के एक माह पहले आई है।

रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की एक घटना का भी जिक्र है। भारत ने साफ किया है कि उसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे पर अमेरिकी एजेंसी से किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2015 में अल्पसंख्यक समुदायों, खास तौर पर ईसाइयों, मुसलमानों और सिखों को भय, उत्पीड़न और हिंसा का शिकार होना पड़ा।

उनके उत्पीड़न के पीछे बड़े तौर पर हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों का हाथ था। पुलिस के पक्षपात और न्यायिक खामियों की वजह से अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा है।

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