एक खूंखार क़ैदी के पीछे 2 सालों से लड़ रहे भारत-पाक

बैंकाक: क्या कभी आपने सोचा है कि बैंकॉक में बंद एक क़ैदी से भारत और पाकिस्तान को क्या मतलब हो सकता है ? लेकिन सैयद मुदस्सर हुसैन नामक यह क़ैदी 2 सालों से हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच बैंकाक की क्रिमिनल कोर्ट लट फारो में कानूनी जंग का मुद्दा बना हुआ है. हुसैन बैंकाक के माहा छाई रोड़ पर बनी सबसे पुरानी और हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है.

दरअसल, इस क़ैदी के लिए भारत-पाक इसलिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि दोनों ही देश इस क़ैदी को अपना नागरिक होने के दावे कर रहे हैं. पाकिस्तान जहाँ उसे मोहम्मद सलीम बताकर अपने देश का बता रहा है, वहीं भारत सैयद मुदस्सर हुसैन उर्फ़ मुन्ना झिंगाड़ा को भारत का नागरिक साबित करने में लगा हुआ है. इस क़ैदी को दोनों देश इसलिए हथियाना चाहते हैं, क्योंकि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के बीच गठजोड़ के कई अहम राज मुदस्सर हुसैन उर्फ मुन्ना झिंगाड़ा के सीने में दफ्न हैं.

ऐसे में भारत को लगता है कि वे हुसैन से पाकिस्तान और दाऊद से सम्बंधित कई ख़ुफ़िया राज़ उगलवा सकते हैं और पाकिस्तान इन राज़ों पर पर्दा डाले रखना चाहता है, इसलिए हुसैन का नाम बदलकर अदालत को गुमराह करने में लगा हुआ है. इसके लिए पाकिस्तान ने अदालत के सामने पासपोर्ट आदि दस्तावेज़ भी पेश किए हैं. आपको बता दें कि मुंबई के जोगेश्वरी का रहने वाला झिंगाड़ा एक गैंगस्टर था. वो ड़ॉन दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील का बेहद करीबी है. मुन्ना के खिलाफ मुंबई में 70 से ज्यादा आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं, वैसे तो हुसैन 2000 से बैंकाक की जेल में बंद है, लेकिन नवंबर 2016 में पीएम मोदी की बैंकाक यात्रा के बाद से उसे भारत लाने की कोशिशें होने लगी. 

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