इंदौर वासियों ने मजदूरों का जीता दिल, इस तरह कर रहे है सेवा

कोरोना की रोकथाम के लिए लॉकडाउन की अवधी को बढ़ाया गया. इस वजह से जो जहां था वो वहीं फसे रह गया. वहीं, दूसरे राज्यों से भूखे-प्यासे पलायन कर रहे प्रवासी मजदूर कम से कम इस बात से खुश हैं कि इंदौर ने उनका दर्द समझा. बायपास पर इंदौर के लोगों को दोनों हाथ जोड़ खाने-पीने की मनुहार देख मजदूर चौंक जाते है. अनजान हाथों की मेहमान नवाजी में भी उन्हें अपने ही नजर दिखाई देते है. कोरोना ने जैसे-जैसे पैर पसारे, लाखों मजदूरों ने महाराष्ट्र, गुजरात सहित अन्य राज्यों से पलायन शुरू कर दिया और अपने घर और पैदल ही निकल पड़े है. ये मजदूर बायपास (एबी रोड) से गुजर रहे हैं. जौनपुर निवासी गंगाराम प्रजापति के अनुसार वह पैदल ही निकला था. रास्ते में एक ट्रक मिल गया और जेब में रखे रुपयों से किराया दे दिया. उसके पास भूखे रहने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं था. सेंधवा के समीप एक ढाबे पर कुछ लोगों ने सेंव-परमल और चाय पिला दी, फिर भी पेटभर खाना नहीं मिल पाया.

शनिवार सुबह जैसे ही राऊ (इंदौर) में प्रवेश किया, एक ढाबे के सामने लोग हाथ जोड़े खड़े हो गए. पांच पट्टी सिखवाल ब्राह्मण समाज द्वारा यहां पोहे और आलूबड़ा परोसा जा रहा था. ट्रस्टी स्पीकर पर जोर देकर बोल रहे थे कि केसरवाली चाय पीए बगैर मत जाना. अध्यक्ष विजय पंड्या के अनुसार वे सुबह 5 बजे से भोजन-नाश्ता बनाना शुरू कर देते हैं. दोपहर तक हजारों लोगों को भरपेट खाना खिलाते हैं.

बता दें की लोहा मंडी में पिछले 25 दिनों से श्रीकृष्णा देवकॉन के संचालक व समाजसेवी नवीन जैन खाना खिला रहे हैं. जैन के अनुसार सहयोगी सतीश सैनी और संजय यादव सुबह जल्दी काम में जुट जाते हैं. राहगीर जाता दिख जाए तो उसे खाना खाने के लिए जरूर बुलाते हैं. बायपास से गुजर रहे कई लोगों के पैरों में चप्पल-जूते नहीं होने की खबर मिली तो मक्सी रोड पर चप्पलें वितरण करना शुरू कर दिया गया है. इसके साथ रोजाना 10 हजार लोगों को नियमित खाना भी खिलाते हैं.

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