लातों के भूत बातों से नहीं मानते

भारत देश में रहकर पाकिस्तान के गुण गाने वालों की कमी कश्मीर में दिखाई नहीं देती है, इसका उदाहरण एक बार फिर उस वक्त सामने आया है जब कश्मीर में अलगाववादी नेताओं ने न केवल पाकिस्तान का झंडा लहराया बल्कि पाकिस्तान जिंदाबाद संबंधी नारे भी लगाए। ऐसा नहीं होगा कि जब भारत विरोधी कार्य किया जा रहा था तब स्थानीय पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौका स्थल पर मौजूद नहीं होंगे, अवष्य ही होंगे लेकिन इसके बाद भी चुप्पी साधे रखना समझ से ही परे प्रतीत होता है। अलगावादी नेताओं द्वारा इस तरह की हरकत पहली बार नहीं की गई है, इसके पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके है लेकिन इसके बाद भी अलगावादी नेताओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई जम्मू कश्मीर राज्य की सरकार द्वारा नहीं की गई लिहाजा अलगाववादी नेताओं के हौसले बुलंद हो चले है।

आखिर अलगाववादियों की मंशा है क्या ! क्या वे आर या पार की लड़ाई चाहते है या फिर उनके साथ सलुक दुश्मनों की तरह करना चाहिए, इस विषय पर तो सरकार को ही विचार मंथन कर कार्रवाई करने की जरूरत है लेकिन एक बात जरूरत तय कही जा सकती है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते है इसलिए ऐसे देश द्रोहियों के खिलाफ कडी से कडी कार्रवाई होना जरूरी प्रतीत होता है। पाकिस्तान की रहनुमाई करने वाले अलगाववादियों से जरा पूछो कि वे जिस देश में रहकर उसका नमक खाते है क्या उन्हें ऐसा करना शोभा देता है, जरा पूछिए उन नेताओं से जो भारत में रहकर पाकिस्तान के गुणगान गाते है, बावजूद इसके पाकिस्तानी सरकार उन्हें फुटबाॅल बनाकर अपनी स्वार्थ पूर्ति करने से बाज नहीं आती, लेकिन इसके बाद भी अलगाववादियों को समझ में नहीं आ रहा है।

यह तो की भाजपा सरकार की हिम्मत ही कही जा सकती है कि वह कश्मीर मामले में किसी को घास नहीं डाल रही है वहीं अलगाववादियों को भी सुध में रखने के लिए दबाव बनाए रख रही है, परंतु इसके बाद भी जब तक स्थानीय सरकार के नुमाइंदे सख्त नहीं होंगे तब तक अलगाववादियों को काबू में नहीं किया जा सकता। यह देश हमारा था, हमारा है और हमारा ही रहेगा। इस देश के साथ गद्दारी करने वालों को पहले भी नहीं छोडा गया और न ही छोड़ा जाएगा, इस बात का इतिहास गवाह है कि गद्दारी करने वालों को बख्शा नहीं गया है और कभी माफ किया गया है।

यह तो पूर्व की केन्द्र सरकारों की कमजोरी रही है कि वह अलगावादी ताकतों के हाथों की कठपुतली बनी हुई बैठी रही और चूं करने की भी हिम्मत तक नहीं हुई लेकिन तारीफ करना होगी केन्द्र की मोदी सरकार की, जिसने देश भक्ति को तो अंगीकार कर हिम्मत से कार्य करना प्रारंभ किया ही है, अलगाववादियों को भी देश कश्मीर मुद्दे से दरकिनार करने का पूरा प्रयास कर यह बता दिया है कि इस सरकार को पूर्व की सरकारों जैसी किसी की दखलअंदाजी पसंद नहीं है। अलगाववादियों ने जो हरकतें की हैं वह क्षम्य नहीं है, अब केन्द्र की मोदी सरकार को चाहिए कि वह एक बार फिर अलगाववादियों को बुरी तरह हडकाएं क्योंकि अब बातों से बात नहीं बनेगी कुछ करके दिखाना होगा.....।

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