स्वतंत्र पारिश्रमिक आयोग तय करेगा सांसदों का वेतन और भत्ता

नईदिल्ली। सांसदों द्वारा बिलों को पारित कर देश को गति देने के विचार पर मतेक्य हो न हो मगर अपना वेतन और भत्ता बढ़ाने के साथ अपने फायदे के मसले पर वे एक हो जाते हैं। यही नहीं इस मामले में बवाल मचा है कि सरकार द्वारा इस तरह की समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा रहा है। इसका समाधान तलाशने के लिए सांसदों द्वारा 3 सदस्यीय आयोग गठित करने पर विचार किया गया। अब यह आयोग सांसदों के वेतन और भत्ते को लेकर चर्चा करेगा। मामले में यह भी कहा गया है कि संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा स्वतंत्र पारिश्रमिक आयोग तैयार करने का प्रस्ताव रखा है।

इस दौरान यह भी कहा गया है कि यह आयोग संसदीय कार्य मंत्री एम. वैंकेया नायडू की अध्यक्षता में कार्य करेगा। हालांकि इसका गठन संसदीय कार्य मंत्रालय से अलग किया जाएगा और यह बेहद स्वतंत्र होगा। मिली जानकारी के अनुसार मंत्रालय की ओर से यह कहा गया है कि आयोग गठित करने का प्रस्ताव इस तरह के एजेंडा नोट में दिया गया है। इस तरह का कार्य सचेतक सम्मेलन में सामने रखा गया है। सांसदों के वेतन, भत्ते और अन्य कार्यों में बढ़ोतरी की सिफारिश के लिए इस आयोग का गठन किया गया है।

यह भी कहा गया कि आम जनता में इस तरह का संदेश भी दिया जा सकता है कि सही और पारदर्शी तरह से कार्य किया जा सकता है। मामले में यह बात सामने आई है कि संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम 1954 में आवश्यक बदलाव किया जा सकता है। इस कानून में सुविधान के अनुच्छेद 106 के तहत विभिन्न प्रावधान दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि सांसदों के वेतन और भत्ते में वर्ष 2010 में बढ़ोतरी हुई थी। 

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