आज़ादी के बाद भारत में विकास

आज़ादी के बाद भारत में विकास

स्वतंत्रता के बाद से भारत में कई बदलाव हुए हैं, कह सकते हैं कई तरह के और क्षेत्र में बदलाव हुए हैं जिन्होंने देश का रुख ही बदल दिया है और एक नई पहचान दी है. इस साल हम 15 अगस्त को 72 वां स्वंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं जिसे हर भारत वासी बड़े ही हर्षोल्लास से मनाता है. देश की आज़ादी के बाद कितना विकास हुआ है जानते हैं इसके बारे में.

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* अर्थव्यवस्था : देश आज़ाद तो हुआ लेकिन आज़ादी के बाद देश की अर्थव्यवस्था बिखर चुकी थी जिससे गरीबी का काफी सामना करना पड़ा. लेकिन उसके बाद देश की अर्थव्यवस्था में काफी सुधार हुआ. अर्थशास्त्रियों ने भारत के आर्थिक विकास के इतिहास को दो चरणों में जिनमे एक था आजादी के बाद 45 साल का और मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था के दो दशकों में विभाजित किया गया. इसके बाद आर्थिक विकास स्थिर हो गया था.

* सेवा क्षेत्र की वृद्धि : ये वृद्धि दो दशक पहले शुरू हुई थी जो सबसे अच्छी थी. देश की सेवा में वृद्धि प्रमुख विकास, टेली सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी के कारण हुई है. आज भी कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपनी टेली सेवाओं और आईटी सेवाओं को आउटसोर्स कर रही है.

* कृषि क्षेत्र का विकास : साल 1950 में कृषि के क्षेत्र में प्रगति स्थिर रही लेकिन 20 वीं शताब्दी में ही इसकी वृद्धि दर लगभग 1 प्रतिशत हुई यानी स्वतंत्रता के बाद विकास दर में प्रति वर्ष 2.6 प्रतिशत की कमी आई. शोध में लगातार निवेश, भूमि सुधार, क्रेडिट सुविधाओं के दायरे का विस्तार और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे में सुधार कुछ अन्य निर्धारित कारक थे, जो देश में कृषि क्रांति लाए थे.

* शिक्षा क्षेत्र में विकास : भारत ने अपनी शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर लाने में सफलता हासिल की. आजादी के बाद कई स्कूल बनाये गए और 86 वें संशोधन को पारित करके 6-14 साल के बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा का मौलिक अधिकार बनाया.

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