स्वतंत्र भारत के इन आंदोलनों ने दिया देश को नया चेहरा

स्वतंत्र भारत के इन आंदोलनों ने दिया देश को नया चेहरा

भारत को आजाद हुए 71 वर्ष बीत चुके हैं और इस बार 15 अगस्त पर सभी देशवासी 72 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं. आजादी के दौरान अपनी मांगों को मनवाने के लिए कई तरह के आंदोलन चलाये गए थे. ऐसे ही आज हम कुछ ऐसे आंदोलन के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके लिए लोग सडकों तक उतर आये थे और उसी उन्होंने देश की किस्मत बदल दी.

* सेव साइलेंट वैली आंदोलन : ये स्वतंत्र के बाद पहला बड़ा आंदोलन था जो केरल के वन वर्षा साइलेंट वैली को बचाने के लिए चलाया गया था. इसी जंगल को बचाने के लिए जन आंदोलन किया गया जिसे 'सेव साइलेंट वैली आंदोलन' कहा गया.

* चिपको आंदोलन : ये आंदोलन 1974 में शुरू हुआ था जिसे चिपको आंदोलन नाम दिया गया था जिसकी प्रणेता गौरा देवी थी जो 'चिपको वूमन' के नाम से भी मशहूर हैं. चिपको आंदोलन में लोग पेड़ों को बचाने के लिए उनसे लिपट जाते थे ताकि उन्हें कोई काट ना पाए. इसलिए इसका नाम चिपको आंदोलन पड़ा.

* जंगल बचाओ आंदोलन : इस आंदोलन की शुरुआत 1980 में बिहार से हुई थी जो बाद में झारखंड और उड़ीसा तक फैल गया. उस समय सरकार ने बिहार के जंगल को सागौन के पेड़ के जंगलों में बदलना चाहा लेकिन इसे रोकने के लिए आदिवासी कबीले एक हुए और जगंल को बचाने के लिए निकल पड़े.

* नर्मदा बचाओ आंदोलन : साल 1985 से ये आंदोलन शुरू हुआ था क्योंकि नर्मदा नदी पर कई बाँध बनाये जा रहे थे. इस आंदोलन में आदिवासियों, किसानों, पर्यावरणविदों ने बांधों को बनाने से रोका जा रहा था जिसमें कई हस्ती शामिल हुई. यहां तक की लोग भूख हड़ताल पर भी उतर आये. 

* निर्भया आंदोलन : 16 दिसंबर 2012 में दिल्ली में हुए एक गैंगरेप के बाद पूरा देश हंगामे पर उतर आया था. इसे निर्भया आंदोलन का नाम दिया गया. देश की विभिन्न राज्य सरकारों और केंद्र सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर विभिन्न कदम उठाये. इसके लिए सरकार ने  महिलाओं के लिए 1090 हेल्प लाइन जारी की ताकि वो सुरक्षित रह सके.

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