रेल रोको आंदोलन में किसानों ने रोकी कोयले की ट्रेन, केंद्र बोला- अपना ही नुकसान कर रहे किसान

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दावा करते हुए कहा है कि सोमवार को किसान संगठनों के 'रेल रोको' ने न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि इसने कोयले की सप्लाई को भी प्रभावित किया. सरकार से संबंधित सूत्रों ने बताया कि सोमवार को कोयला ले जा रहे कम से कम 46 रेलवे ट्रैक फंसे रहे, क्योंकि उस दिन किसानों ने पूरे देश में रेल रोको आंदोलन चलाया था. कोयले से लदी ये गाड़ियां उन राज्यों में पहुंचनी थी, जहां पावर प्लांट कोयले की किल्लत से जूझ रहे हैं.

पिछले सप्ताह कोयले की कमी और बिजली संकट के लिए आलोचना झेल रही केंद्र सरकार ने कहा था कि राज्य सरकारें बिजली की बढ़ती मांग का अनुमान लगाने में विफल रही हैं. कोयला मंत्रालय से संबंधित एक सूत्र ने बताया कि, 'रेल रोको आंदोलन ने पंजाब और राजस्थान में मालगाड़ियों के आवागमन को सबसे अधिक प्रभावित किया है. ये ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार की पूरी मशीनरी देश में बढ़ती कोयले की मांग को पूरा करने के लिए कार्य कर रही है.'

एक और अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया है कि आंदोलन कर रहे लोग किसान नहीं, बल्कि दलाल थे. उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी पटरियों पर बैठ गए, जिससे कोयला ले जा रही मालगाड़ियों का आवागमन प्रभावित हुआ. इस वजह से पावर स्टेशनों में कोयले की आपूर्ति पर असर पड़ा. 

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