पर्यावरणीय से जुडी महत्वपूर्ण और बहुमूल्य बातें

पर्यावरणीय रसायन विज्ञान के अंतर्गत पर्यावरण में पाये जाने वाले रसायनों के स्रोत क्षेत्र, स्थानांतरण व प्रभाव के साथ-साथ पर्यावरणीय रसायनों पर मानवीय व अन्य जैविक क्रियाओं के प्रभाव का अध्ययन किया जाता है| पर्यावरणीय रसायन विज्ञान की वर्तमान में पर्यावरणीय असंतुलन व प्रदूषण के अध्ययन व उनके निवारण के उपायों को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका है|

पर्यावरणीय प्रदूषण से तात्पर्य पर्यावरण में अवांछित व हानिकारक तत्वों के प्रवेश से है,जोकि जीवित जीवों के साथ-साथ सम्पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं| पर्यावरणीय घटकों के आधार पर पर्यावरणीय प्रदूषण भी कई तरह का होता है,जैसे-वायु या वायुमंडलीय प्रदूषण, जल प्रदूषण,ध्वनि प्रदूषण,भूमि प्रदूषण आदि| लेकिन वायु या वायुमंडलीय प्रदूषण इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है|

वायु या वायुमंडलीय प्रदूषण

वायु या वायुमंडल विभिन्न गैसों व तत्वों का मिश्रण है और ये गैसें व तत्व वायु में एक निश्चित मात्रा व अनुपात में पाये जाते हैं | लेकिन जब बाहरी तत्व के वायु में मिलने या किसी गैस के वायुमंडलीय अनुपात में वृद्धि होने से वायु की गुणवत्ता मे हृास हो जाता है और वह जीव-जंतुओ और पादपों के लिए हानिकारक हो जाती है, तो उसे ‘वायु प्रदूषण’ कहते हैं और जिन कारकों से वायु प्रदूषित होती है उन्हें ‘वायु प्रदूषक’ कहते है।
वायु प्रदूषकों को निम्नलिखित दो भागों में बाँटा जाता है:

1. प्राथमिक वायु प्रदूषक
2. द्वितीयक वायु प्रदूषक

‘प्राथमिक प्रदूषक’ सीधे एक प्रक्रिया से उत्सर्जित होते हैं,जैसे ज्वालामुखी क्रिया से निकली राख, वाहनों से निकली कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस, उद्योगों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड गैस आदि।

‘द्वितीयक प्रदूषक’ सीधे उत्सर्जित नहीं होते हैं, बल्कि प्राथमिक प्रदूषकों की आपसी क्रिया से वायु में बनते हैं, जैसे-प्रकाश-रासायनिक धूम्र कोहरा व पेरोक्सीएसिटाइल नाइट्रेट, कुछ वायु प्रदूषक प्राथमिक और द्वितीयक दोनों तरह के हो सकते हैं, यानि वे सीधे भी उत्सर्जित हो सकते हैं और अन्य प्राथमिक प्रदूषकों से भी बन सकते हैं।

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