जलवायु परिवर्तन से भारत का मौसम हो सकता है प्रभावित

Mar 02 2021 09:59 AM
जलवायु परिवर्तन से भारत का मौसम हो सकता है प्रभावित

जलवायु परिवर्तन से भारत में भविष्य के सूखे की तीव्रता में वृद्धि होगी, जिसका फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, सिंचाई की मांग बढ़ेगी और भूजल का दोहन बढ़ेगा, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार शोधकर्ताओं ने मिट्टी की नमी में तेजी से कमी के कारण अचानक सूखे की तीव्रता बढ़ जाएगी। 

उन्होंने कहा कि पारंपरिक सूखे की तुलना में अचानक सूखा दो से तीन सप्ताह में एक बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, इससे फसल पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा और सिंचाई के लिए पानी की मांग बढ़ जाएगी। यह अध्ययन एनपीजे क्लाइमेट जर्नल में प्रकाशित हुआ है। यह मानसून के दौरान होने वाले सूखे में मानव जनित जलवायु परिवर्तन की भूमिका की जांच करता है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा एकत्रित मिट्टी के नमूनों और जलवायु अनुमानों का इस्तेमाल किया। शोधकर्ताओं ने मनाया और भविष्य के जलवायु परिदृश्यों के तहत देश में फ्लैश ड्रॉट्स की आवृत्ति की जांच करने के लिए भारत के मौसम विभाग (आईएमडी) से मिट्टी की नमी सिमुलेशन, टिप्पणियों और जलवायु अनुमानों का उपयोग किया।

टीम ने नोट किया कि 1951–2016 से देखी गई समय सीमा में सबसे खराब फ्लैश 1979 में हुआ, जब देश का 40 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हुआ था। शोधकर्ताओं ने बताया कि समवर्ती गर्म और शुष्क चरम सीमाओं की आवृत्ति में लगभग पांच गुना वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे 1979 से 21 वीं सदी के अंत तक फ्लैश ड्रॉट्स में लगभग सात गुना वृद्धि हुई है। आईआईटी गांधीनगर में सिविल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर विमल मिश्रा ने कहा, "हम पाते हैं कि भारत में फ्लैश ड्रोन मॉनसून के विराम या विलंबित मॉनसून के कारण होता है और भविष्य में फ्लैश ड्रॉट की संख्या बढ़ जाएगी।"

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