'बेटियों को ‘वेश्या’ बनाना है तो स्कूल भेजो', गर्ल एजुकेशन के खिलाफ यूट्यूबर ने बनाया विवादित गाना

'बेटियों को ‘वेश्या’ बनाना है तो स्कूल भेजो', गर्ल एजुकेशन के खिलाफ यूट्यूबर ने बनाया विवादित गाना
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इन दिनों सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूट्यूबर हाफिज हसन इकबाल चिश्ती का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हसन इकबाल ने एक गाना गाया है, जिसमें वे लोगों से अपनी लड़कियों को स्कूल न भेजने की अपील कर रहे हैं। उनका दावा है कि स्कूल में लड़कियाँ डांस करती हुई मिली हैं। इस गाने का शीर्षक है- अगर लड़कियों को कंजरी (महिलाओं का चरित्र हनन के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द) बनाना है तो वो उन्हें स्कूल भेजें।

यह वीडियो 19 जून 2024 को रिलीज किया गया था तथा इसे अब तक 1 लाख 73 हजार लोग देख चुके हैं, जबकि 2.9 हजार लोगों ने इसे पसंद किया है। वीडियो में हसन इकबाल ने विवादित बोल कहे हैं, जैसे – "“अपनी धी स्कूलो हटा ले, ओथे डांस करदी पाई ए (यानी अपनी लड़की को स्कूल से निकाल ले, वो वहाँ डांस करती हुई मिली है)” वही इस गाने के बोल सुनने के बाद पढ़े-लिखे लोग इस पर कमेंट करके इसका विरोध कर रहे हैं तथा पूछ रहे हैं कि पाकिस्तान किस दिशा में जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ कई पाकिस्तानी यूजर्स इस गाने को सराह रहे हैं तथा हसन इकबाल चिश्ती को धन्यवाद दे रहे हैं। कई तो कमेंट में गाने में कही बातों से सहमति व्यक्त करते हुए "हसन इकबाल चिश्ती अमर रहे" जैसी बातें भी बोल रहे हैं।

आज के वक़्त में हर विकासशील देश में लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाने पर जोर दिया जा रहा है जिससे समाज और अधिक सशक्त हो सके, किन्तु कुछ इस्लामी मुल्कों में लड़कियों को उनके मूलभूत अधिकारों से भी वंचित करने के प्रयास होते हैं। ऐसे मुल्कों में लड़कियों के लिए बेसिक शिक्षा पाना ही बहुत मुश्किल है, तो वहाँ उच्च शिक्षा के बारे में सोचना भी कठिन है। इस्लामी मुल्कों में लड़कियों की इस स्थिति के लिए हसन इकबाल चिश्ती जैसे लोग जिम्मेदार हैं, जो इस्लाम के नाम पर आम लोगों को उकसाते हैं कि वे अपनी बच्चियों को शिक्षा न दिलाएँ और पर्दे में बिठाएँ। इस प्रकार की सोच तालिबान की नीतियों से मेल खाती है, जिन्होंने अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा पर 2022 से बैन लगाया हुआ है। तालिबान का दावा है कि शैक्षिक केंद्रों में लड़कियाँ बिगड़ जाती हैं और वे वहां तालिबानी ड्रेस कोड का पालन नहीं करतीं।

अब पाकिस्तान में भी इसी आधार पर लड़कियों की शिक्षा को बंद करवाने की सोच सामने आई है। यह गाना उसी मानसिकता को दर्शाता है। अगर इस गाने से कोई एक व्यक्ति भी प्रभावित होता है, तो उस व्यक्ति के घर की लड़कियों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो सकती है। कट्टरपंथी तत्वों का यह पुराना तरीका है कि मजहब बचाने की आड़ में सबसे पहले महिलाओं को निशाना बनाया जाए। उनके कपड़ों और सजने-सँवरने से लेकर शिक्षा तक हर चीज को निशाना बनाया जाता है। शिक्षा से वंचित करने के दुष्परिणाम लड़कियों के जीवन पर बेहद घातक हो सकते हैं।

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