कलेक्टर कैसे बनते हैं ?

Aug 11 2020 09:56 AM
कलेक्टर कैसे बनते हैं ?

पुलिस, डॉक्टर, वकील और कलेक्टर आदि ये ऐसे पद है, जो सीधे समाज से जुड़ें होते हैं. इनमे सबसे प्रतिष्ठित पद में से कलेक्टर का पद है. इसे लेकर तो हमारे यहां बच्चों को लेकर कहा भी जाता है कि पढ़-लिखकर क्या कलेक्टर बन जाएगा. तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर कलेक्टर कैसे बनते हैं ?

 

कलेक्टर बनने के लिए क्या जरूरी ?

- इसके लिए पहले तो आपका ग्रेजुएशन (किसी भी विषय में) पूरा होना चाहिए.
- जबकि अगली कड़ी में यूपीएससी द्वारा आयोजित सी.एस.ई. देना आपके लिए आवश्यक है. 

कलेक्टर बनने के लिए कौन-सी परीक्षा ?

हम आपको ऊपर संक्षेप में बता चुके हैं कि इसके लिए ग्रेजुएशन के बाद यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) द्वारा आयोजित सी.एस.ई. परीक्षा देने की जरूरत होती है. आप चाहे तो ग्रेजुएशन करते हुए ही यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन परीक्षा की तैयारी भी साथ-साथ कर सकते हैं. ग्रैड 1 के अधिकारियों की भर्ती के लिए इस परीक्षा का आयोजन कराया जाता है. 

सिविल सर्विस एग्जाम के तीन चरण...

प्रारंभिक परीक्षा//Preliminary Exam...

इसका आयोजन जून-अगस्त के मध्य होता है. इसमें कुल दो पेपर होते हैं. जहां पहला पेपर सामान्य अध्यन का जबकि दूसरा सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट का होता है. दोनों ही पेपर के अंक 250-250 होते हैं. यदि उम्मीदवार इस परीक्षा में सफलता पा लेते हैं, तो फिर वे मुख्य परीक्षा दे सकते हैं. 

मुख्य परीक्षा/Main exam...

यह परीक्षा थोड़ी बड़ी होती है और इसमें आपको कुल 9 पेपर देने होते हैं. जो कि इस प्रकार से हैं. 

भारतीय भाषा : इस पेपर के कुक अंक 200 होते हैं और आपको 18 भाषाओँ में से एक का चयन करना होता है.
अंग्रेजी : 200 अंक.
निबंध : इस पेपर में आपको 2 विषयों पर निबंध लिखना रहता हैं. अंक 250.
सामान्य अध्यन : 250 अंक. 
सामान्य अध्यन : 250 अंक.
सामान्य अध्यन : 250 अंक. 
सामान्य अध्यन : 250 अंक. 
8वां और 9वां पेपर वैकल्पिक होता है, इसे आप खुद चुन सकते हैं. ये दोनों पेपर भी 250-250 अंकों के होते हैं. 

साक्षात्कार...

प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में सफलता के बाद आपको अंत में साक्षात्कार से गुजरना होता है. इसमें उम्मीदवारों को जो मुख्य परीक्षा आयोजित की गई थी, उसके परिणाम के मेरिट के आधार पर बुलाया जाता हैं. बता दें कि यह साक्षात्कार 750 अंक का होता है.

कौन होता है कलेक्टर, क्या होते है कलेक्टर के कार्य ?

किसी भी जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जो व्यक्ति पहचाना जाता है, उसे कलेक्टर कहा जाता है. पूरे जिले पर कलेक्टर का नियंत्रण होता है. जिले के करीब हर विभाग कलेक्टर के ही अधीन होते है. जिले से संबंधित सभी तरह के फैसले कलेक्टर ही लेता है. उदाहरण के तौर पर आपदा प्रबंध, सरकारी योजनायों को लागू करवाना, ऋण वितरण, भूमि मूल्यांकन, कर्ज वसूली, कर वसूली, भूमि अधिग्रहण, आम जानता की समस्या का समाधान आदि ये सभी कार्य कलेक्टर के होते हैं. साथ ही कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना भी कलेक्टर के बड़े कार्यों में से एक हैं. 

 

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