होली के रंग न्यूजट्रैक की "चुभन" के संग

Mar 05 2015 01:03 AM
होली के रंग न्यूजट्रैक की
धींगामस्ती का त्योहार होली हो और राजनीति, राजनीतिज्ञों को न्यूजट्रैक में प्रकाशित-प्रसारित होने वाली ’चुभन’ के रंग से सराबोर न किया जाये.....तो मजा ही क्या है....! लिहाजा हमारा दायित्व बनता है कि ’चुभन’ के रंग की चुभन इतनी चुभे कि अगले बरस की होली तक याद रखें....वैसे क्षमा प्रार्थना सहित क्योंकि.....बुरा न मानों होली है......! 

 सबसे पहले बात करें कांग्रेस की लुटिया डूबोने वाले परिवार की....! वैसे इस परिवार में ले देकर तीन सदस्य पाए जाते है...एक अपनी सोनिया अम्मा, दूसरे इंडियन पप्पु तथा अम्मा के कुंवारे लाड़ले बेटे राहुल और तीसरी अपने पतिदेव के ’जमीनी’ कारनामों के कारण परेशान रहने वाली प्रियंका बेटी.....! माॅं बेटे ने लोकसभा चुनाव से लेकर विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को ऐसा रंग लगाया कि वर्षों पुरानी कांग्रेस बेरंग हो गये....! 

अब बेरंग कांग्रेस का रंग बदलने के लिये भले ही कवायद की जा रही हो लेकिन बेटा राहुल, तुम कितना ही ऐड़ी चोटी का जोर लगा लों.....तुम्हारे ही लोग ऐसे रंग में रंगे हुये है कि कांग्रेस को नये रंग में रंगने ही नहीं देंगे....! इस रंग को कहते है ’टांग खींचने वाला रंग’! यह रंग कांग्रेस के साथ ही अन्य सभी राजनीतिक दलों में वर्ष भर पाया जाता है....! होली के रंगीन त्योहार पर हम माता होलिका से प्रार्थना करते है कि कांग्रेस की आत्मा को शक्ति दे, ताकत दें, कांग्रेसियों को सद्बुद्धि दें, ताकि वे बची खुची कांग्रेस में प्राणवायु फूंक सके। 

 कसम होली के केमिकल रंगों की कांग्रेस को बचाओं यारों वरना स्वर्ग में बैठी प्राचीन कांग्रेसियों की आत्मा बद्दुआ देगी कि तुमने डुबोया, होली में ऐसा रंग लगे कि छूटे न छूटे....! लो अब आते है अपने मांझी पर.....अरे मांझी को नहीं जानते....मांझी मतलब...नीतीश कुमार का टेंशन....फेवीकोल का जोड़....ऐसा चिपका कि नीतीश को पसीना आ गया....! मांझी और नीतीश कुमार ने भी बिहार में राजनीति का रंग खूब भरमाया.....! मांझी ने नीतीश को सीएम की कुर्सी के स्वप्न में रंग में भंग डाला....आखिरकार जीत नीतीश कुमार की हुई, जिसने मांझी के चेहरे को काला पीला कर डाला और कुर्सी का मोह छोड़ना पड़ा.....! 

 नीतीश कुमार भले ही कुर्सी का सुख लेकर फूलकर कुप्पा हो रहे हो परंतु मांझी घायल शेर की तरह होंगे, इसमें कोई दोराय नहीं हो सकती....! बिहारी राजनीति के रंग का खुमार भाजपा पर भी चढ़ा था, मुंह भी मारा, परंतु.....चल नहीं सकी.....! बापड़े नरेन्द्र मोदी की तो बस पूछो ही मत....! जब से प्रधानमंत्री बने है....अपनों से लेकर सामने वाले तक बयानों के रंगों से सराबोर करने में जुटे हुये है......! कभी संसद में ’कुर्ता’ खींचते है तो कभी वह भी हो जाता है....जिसके बारे में मोदीजी ने सोचा भी नहीं होगा.....! 

 बयानों के रंग की चमक मोदी के चेहरे पर साफ देखी जा सकती है, बावजूद इसके उन्होंने चेहरे को मुर्झाया नहीं.....यह होता है छप्पन इंच का सीना......! ओबामा को बुलाकर अमेरिकी और भारत की दोस्ती का नया रंग बिखेरा....सूट पहनकर विरोधियों को उकसाया..... कि खेलते रहो मोदी सूट-सूट....! मैने तो पहन लिया....तुम्हारे में हिम्मत हो तो दस लाख का पहनकर दिखाओं.....! माननीय प्रधानमंत्री जी बुरा न मानना, जड़ अपने ही खोदने वाले होते है, इसलिये जरा संभलकर....अपने निर्णयों के रंगों को इतना पक्का कर लों कि देखते ही.....! वैसे मोदी जी ने भी देश की जनता के साथ बजट की होली खेलने से गुरेज नहीं किया....उद्योगपतियों के साथ मिलकर महंगाईरुपी रंग की कढ़ाई में जनता को डुबो दिया...! जनता अब साल भर तक मोदी के रंग में डूबी रहकर कोसती रहेगी ...! 

 बात की जाये....खांसी सर्दी से परेशान रहने वाले अरविंद केजरीवाल की....! योगेन्द्र, प्रशांत ने बेचारे की होली बिगाड़कर रख दी.....! ऐसा कलह घोला कि टेंशन के मारे शुगर बढ़ गई और बेंगलुरू जाना पड़ा....चलो दस दिनों तक पिंड तो छूटेगा...। कीड़े पड़े ’दडि़यल’ तुममे.....सिर पर न चढ़ता तो अच्छा रहता......शुगर बढ़वा दी... मेरी होली बिगाड़ दी....दिल्ली में होता तो झाड़ू लेकर निकल पड़ता ताकि रंग गुलाल को साफ कर देता....तो तुम्हारा क्या जाता....! 

 मध्यप्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान अच्छे खासे ’व्यापमं’ के रंग से बचे हुये थे....लेकिन दिग्विजय सिंह को व्यापमं की ’खुजाल’ चली और उन्होंने शिवराज को....परंतु शिव तो शिव है....दिग्गी की खुजाल मिटाने के लिये नियुक्तियों घोटाले का रंग छिड़क दिया, फिलहाल दिग्गी महाराज इस रंग को छुड़ाने हेतु प्रयासरत है...रही बात अन्यों की, जिसने शिव को तकलीफ देने का प्रयास किया, वे भी शिव के तांडवी रंग में ऐसे रंगे कि.....! 

 होली के इस व्यंग्यात्मक रंग में हम पीडीपी-भाजपा गठबंधन को कैसे भूल सकते है....ये बंधन तो प्यार का बंधन है......सरकाई ली खटिया....घाटी में जाड़ा लगे.....पीडीपी भाजपा को और भाजपा को पीडीपी प्यारी लगे.....! मुफ़्ती बधाई के पात्र है, जो कुर्सी पर बैठते ही पाकिस्तान की हिमाकत करने लगे, आतंकवादियों को दोस्त समझने लगे, अब इससे ज्यादा आगे क्या मुफ़्ती और चुभन पढ़ने वाले पाठक स्वयं समझदार है, बहरहाल.....होली की सभी को हमारी ओर से हार्दिक शुभकमानायें......कांटा लगा.....हाय लगा.....अरे बोलो तो सही....लगा कि नहीं.....!