इस वजह से होली पर जरूर करें भांग का सेवन

आप सभी को बता दें कि होली बसंत ऋतु में मनाया जाने वाला रंगों का पावन पर्व माना जाता है. ऐसे में फाल्गुन माह में मनाए जाने की वजह से इसे फागुनी भी कहते हैं और देशभर में हर्षोल्लास के साथ यह पर्व मनाते हैं. ऐसे में आप सभी को बता दें कि मुग़ल शासनकाल में भी होली को पूरे जोश के साथ मनाया जाता था और अलबरूनी ने अपने सफ़रनामे में होली का खूबसूरती से ज़िक्र किया है. ऐसे में इस दिन कई लोग भांग भी खूब पीते हैं. जी दरअसल होली और भांग का गहरा संबंध है. जी हाँ, हिंदू धर्म में भांग का संबंध सीधे रूप में भगवान शिव शंकर से है वहीं देवताओं की चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में भांग का उपयोग औषधि के रूप में करते हैं.

आप सभी को बता दें कि प्राचीन हिंदू पवित्र ग्रंथ अथर्ववेद में, भांग के पौधे को पृथ्वी के पांच सबसे पवित्र पौधों में से एक के रूप में वर्णित किया गया है और इसे “खुशी का स्रोत” या “खुशी देने वाले पौधे” के रूप में भी जाना जाता है. कहते हैं होली को मस्ती और आनंद का पर्व मनाते हैं और भांग का संबंध हिंदू धर्म में उत्साह और शिव की बूटी के रूप में है.

कहा जाता है भांग और धतूरे के सेवन से भगवान शिव हलाहल विष के प्रभाव से मुक्त हो गए थे इस कारण से होली के अवसर और भगवान हर और हरि को याद करते हुए लोग भंग का सेवन किया जाता है. वहीं इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि भांग एक औषधि है जो पाचक का काम करता है इस कारण से होली के अवसर पर लोग गरिष्ठ भोजन कर लेते हैं और भांग खाकर उसे पचा लेते हैं.

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