भारतीय ध्वज का इतिहास : 112 साल में 6 बार बदला हमारा तिरंगा

आगामी 15 अगस्त को हिन्दुस्तान आजादी की 72वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा हैं. इस दिन देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे और पूरा देश इस दिन हाथों में तिरंगा लिए इस 72वीं वर्षगांठ का जश्न मनाएगा. लेकिन हमें इस तिरंगे के इतिहास से भी रूबरू होना आवश्यक है. केसरिया, सफ़ेद, हरे रंग और अशोक चक्र से निर्मित हमारा यह तिरंगा कब-कब हमें नए रूप में मिला आज हम इसी विषय पर आपसे चर्चा करेंगे. बता दे कि आजादी मिलने के पूर्व से लेकर अब तक तिरंगा कुल 6 बार बदला जा चुका है यहां हम जानेंगे कब-कब तिरंगे में क्या-क्या बदलाव हुए. 

1906 का भारतीय राष्ट्रीय ध्वज...

सबसे पहले भारतीय ध्वज साल 1906 में अस्तित्वा में आया था. जिसमे कुछ फूल, एक चाँद और एक चक्र मौजूद था. इसमें हरा, पीला और लाल कलर भी मौजूद था. हालांकि यह एक गैर आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज था. 

1907 का भारतीय राष्ट्रीय ध्वज...

भारत का पहला गैर आधिकारिक ध्वज अधिक समय तक नहीं रहा और भारत को अगले ही साल नया राष्ट्र ध्वज मिला. इस राष्ट्रध्वज में भी चाँद सितारे आदि मौजूद था. साथ ही इसमें तीन रंग केसरिया, हरा और पीला शामिल था. इस ध्वज को भिकाजी कामा द्वारा पेरिस में फहराया गया था. बाद में इसे एक सम्मलेन के दौरान बर्लिन में भी फहराया गया था. 

1917 का भारतीय राष्ट्रीय ध्वज...

भरता का दूसरा राष्ट्र्रीय 10 साल तक मान्य रहा. इसके बाद साल 2017 में भारत को एक और नया ध्वज मिला. जो कि पूर्व के दोनों राष्ट्र्रीय ध्वज से काफी अलग था. इसे होम रूल आंदोलन के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने फहराया था. इसमें कुछ सितारे, एक चंद्र और हरे-लाल रंग का समावेश था. 

1921 का भारतीय राष्ट्रीय ध्वज...

तीसरा राष्ट्र ध्वज 4 साल के लिए मान्य रहा. जल्द ही भारत को साल 1921 में नया राष्ट्र ध्वज मिल गया. बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में किया गया यहां आंध्र प्रदेश के एक युवक ने एक झंडा बनाया और गांधी जी को दिया. यह दो प्रमुख रंगों हरे और लाल से निर्मित था. जो कि 2 धर्मों हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधिव करते हैं. गांधी जे ने बाद में इसमें चरखा जोड़ा.

1931 का भारतीय राष्ट्रीय ध्वज...

1921 में निर्मित भारत का चौथा राष्ट्र ध्वज 10 सालों तक अस्तित्व में रहा. 1931 में हिंदुस्तान को एक बार फिर नया राष्ट्रध्वज मिला. चौथे राष्ट्रध्वज की तरह ही पांचवे राष्ट्रध्वज में भी चरखा का महत्वपूर्ण स्थान रहा. हालांकि रंगों में इस बार हेर-फेर हुआ. चरखा के साथ ही केसरिया, सफ़ेद और हरे रंग का संगम रहा. इंडियन नेशनल कांग्रेस (आईएनसी) ने औपचारिक रूप से इस ध्वज को अपनाया था.

भारत का अंतिम और वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज...

कांग्रेस पार्टी का पांचवा राष्ट्र ध्वज ही भारत का अंतिम राष्ट्र ध्वज रहा. इसमें केवल एक बदलाव किया गया था. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चरखा इसमें से हटाया गया और उसके स्थान पर इसमें सम्राट अशोक के चक्र को स्थान दिया गया. इस तिरंगे का जन्म 22 जुलाई 1947 को हुआ था. बाद में भारत की आजादी में इस तिरंगे ने अपना सबसे महत्वपूर्ण रोल अदा किया. भारत का यह ध्वज आज विश्व भर में इसी रूप में फहरा रहा है. 

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