बाँदा लोकसभा सीट: 30 सालों से यहां जीत को तरस रही कांग्रेस, क्या इस बार ख़त्म होगा सूखा ?

बाँदा लोकसभा सीट: 30 सालों से यहां जीत को तरस रही कांग्रेस, क्या इस बार ख़त्म होगा सूखा ?

लखनऊ:  उत्तर प्रदेश का बांदा जिला चित्रकूट मंडल का ही एक हिस्सा है, जो मध्यप्रदेश से की सीमा से लगा हुआ है. महर्षि वामदेव के नाम से बांदा लोकसभा को नाम मिला है. चित्रकूट मंडल का हिस्सा होने के कारण इस शहर से लगे चित्रकूट और कालिंजर को देखने के लिए बड़ी  संख्या में पर्यटक आते हैं. वर्ष 2014 के चुनाव में मोदी लहर ने इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की थी. 

बांदा लोकसभा सीट पर पहली दफा वर्ष 1957 में चुनाव हुआ और राजा दिनेश सिंह सांसद निर्वाचित हुए. वर्ष 1967 में भी कांग्रेस ने यहां से जीत हासिल की. किन्तु वर्ष 1967 में वामपंथी दल सीपीआई ने कांग्रेस को जीत की हेट्रिक नहीं लगाने दी और जागेश्वर ने जीत दर्ज की. वर्ष 1971 में पहली दफा जनसंघ ने इस सीट से अपना खाता खोला. वर्ष 1977 में लोकदल के अंबिका प्रसाद ने जीत दर्ज की. 1980 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने फिर इस लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करते हे वापसी की. वर्ष 1984 में भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की.

वर्ष 1989 में सीपीआई दूसरी दफा जीत दर्ज करने में कामयाब रही. 1991 में पहली बार भाजपा कमल खिलाने में सफल रही. वर्ष 1996 में बसपा के राम सजीवन सिंह यहाँ से निर्वाचित हुए. 1999 में एक बार फिर बसपा ने जीत हासिल की. वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में सपा के श्यामाचरण गुप्ता ने जीत दर्ज की. वर्ष 2009 में फिर सपा ने इस सीट से जीत हासिल की और आरके पटेल सांसद निर्वाचित हुए. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर पर सवार भाजपा के टिकट पर भैरो प्रसाद मिश्रा यहां से सांसद बने.

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