सांप्रदायिक तनाव के बाद भी हिंदूओं ने पेश की सांप्रदायिकता की मिसाल

Oct 03 2015 10:04 AM
सांप्रदायिक तनाव के बाद भी हिंदूओं ने पेश की सांप्रदायिकता की मिसाल

दादरी। उत्तरप्रदेश के बिसाहड़ा ग्राम में सांप्रदायिक सद्भाव की अनोखी मिसाल पेश की गई है जिसमें कहा गया है कि बिसाहड़ा गांव में कुछ हिंदू पड़ोसियों द्वारा मुस्लिम परिवार के करीब 70 लोगों का जीवन बचाया गया है। यही नहीं गौहत्या और गौमांस भक्षण करने की अफवाह के बाद उसकी पीटपीटकर हत्या कर दी गई। यही नहीं सांप्रदायिक तनाव के चलते हिंदुओं द्वारा भीड़ के आने से पहले ही मुस्लिम पुरूषों, महिलाओं और बच्चों को बचा लिया गया। सांप्रदायिक सद्भाव की ऐसी मिसाल बड़ी अनोखी मानी जा रही है।

जहां लगभग हर रोज़ राजनीति सांप्रदायिकता भरे बयानों से गर्मा रही है वहीं दादरी में सद्भाव की अनोखी मिसाल देखने को मिली है। हिंदु अपनी जान पर खेलकर मुस्लिमों को बचाने में जुट गए। यही नहीं पुरूषों, महिलाओं और बच्चों को बचा लिया गया। भीड़ ने मुहम्मद की हत्या कर दी। हिंदुओं द्वारा मुस्लिमों के घरों की सुरक्षा की गई। 

मुस्लिमों के ये मकान खाली थे। बिसाहड़ा ग्राम के 65 वर्षीय अब्दुल मुहम्मद द्वारा कहा गया कि हिंदू पड़ोसियों द्वारा कहा गया कि भीड़ घरों की ओर जा रही थी। वे डर गए और भीड़ के प्रवेश करने से पूर्व ही वे घर छोड़ने का प्रयास करने लगे। मस्जिद के समीप भीड़ पहुंचते ही मुस्लिम धर्मावलंबी अपने घरों से निकल गए और हिंदूओं ने उन्हें बचा लिया। 

भीड़ जब मुस्लिम घरों के समीप पहुंची तो अशोक कुमार, विनीत और उमेश द्वारा नाटकीय तरह से संयुक्त परिवार को बचा लिया गया। अशोक परिवार के वृद्धों, महिलाओं व बच्चों को तालाब पार करते हुए अन्यत्र ले जाया गया। उमेश और विनीत द्वारा परिवार के सामान को ढोने वाले वाहन संकरी गली से होते हुए निकले। विनीत द्वारा कहा गया कि लोगों को बड़ी सावधानी से उनके घरों से निकाल लिया गया। जब मामला शांत हो गया तो मुस्लिम परिवार फिर लौट गया।

दो दिन के बाद मुस्लिम परिवार शांति कायम होने के बाद फिर लौट गए। गांव में सदैव सुरक्षित अनुभव किया करते थे। उन्होंने कहा कि लेकिन उनका विश्वास उठा मगर उन्हें जान से अधिक महिलाओं की इज्जद की चिंता है। महिलाऐं गांव में लौटकर नहीं गईं। उन्हें हिंदूओं का ही विश्वास है।