हिंदू मान्यताओं को वैज्ञानिक दृष्टि से देखने की जरूरत: भागवत

जयपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डाॅ. मोहन भागवत ने हाल ही में यह कहा कि हिंदू मान्यताओं और धार्मिक मूल्यों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। क्योंकि शाश्वत जीवन मूल्यों के आधार पर दुनिया से अच्छी बातों को स्वीकार करने की भारत की परंपरा रही है। जिन मूल्यों को किसी तरह का आधार नहीं है उन्हें समाप्त करना जरूरी है। इस दौरान डाॅ. भागवत ने कहा कि हिंदू जीवन स्त्री और पुरूष का एक तत्व है।

मगर यह दो अलग -अलग अभिव्यक्तियों को देखता है। इसका जोर एकता की ओर ही जाता है यह समानता की ओर नहीं जाता है। सरसंघचालक ने कहा कि महज हिंदू धर्म में संतुलित तरह से सृजन और निर्माण को आगे बढ़ाने की योग्यता रखी जाती है। मिली जानकारी के अनुसार डाॅ. भागवत यहां एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा और मूल्य वैज्ञानिक कसौटी पर खरे उतरते हैं। मगर भारतीय धर्म में यदि कहीं भी रूढ़ियों को स्थान दिया गया है तो उन्हें वैज्ञानिक आधार पर देखने की जरूरत है।

यदि उनकी जरूरत न हो और उनका कोई वैज्ञानिक आधार न हो तो उन्हें नहीं अपनाया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि युगों - युगों से यह माना जाता रहा है कि भारतीय दर्शन और धर्म में वैज्ञनिकता का समावेश है। हिंदू धर्म के तीज - त्यौहार हर कार्य विज्ञान सम्मत हैं और उनमें प्रकृति का समावेश होता है। 

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