हिंदी शायरी

1- फलसफा समझो न असरारे सियासत समझो,

जिन्दगी सिर्फ हकीक़त है हकीक़त समझो,

जाने किस दिन हो हवायें भी नीलाम यहाँ,

आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो।

 

2- समझने ही नहीं देती सियासत हम को सच्चाई,

कभी चेहरा नहीं मिलता कभी दर्पन नहीं मिलता।

 

3- जो तीर भी आता वो खाली नहीं जाता,

मायूस मेरे दिल से सवाली नहीं जाता,

काँटे ही किया करते हैं फूलों की हिफाज़त,

फूलों को बचाने कोई माली नहीं जाता।

 

4- अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,

फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​,

ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,

अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।

 

5- कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,

चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है,

माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,

पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।

 

6- हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ,

दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे,

ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर,

जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे।

 

7- जरुरी तो नहीं जीने के लिए सहारा हो,

जरुरी तो नहीं हम जिनके हैं वो हमारा हो,

कुछ कश्तियाँ डूब भी जाया करती हैं,

जरुरी तो नहीं हर कश्ती का किनारा हो।

 

8- वक़्त नूर को बेनूर कर देता है,

छोटे से जख्म को नासूर कर देता है,

कौन चाहता है अपनों से दूर रहना,

पर वक़्त सबको मजबूर कर देता है।

 

9- न जी भर के देखा न कुछ बात की,

बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की।

 

10- कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं,

कहाँ दिन गुज़ारा कहाँ रात की।

 
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