हिमालय पर खतरा तो होगी पूरी दुनिया प्रभावित -प्रो. दीनबंधु साहू

नई दिल्ली। बीते कुछ सालो से हिमालय में लगातार दुर्घटनाएं घाट रही हैं, जो इस और इशारा कर रही है की पारिस्थितिकीय असंतुलन के कारण हिमालय को नुकसान पहुंच रहा है। हिमालय आज खुद को खतरे में महसूस कर रहा है। यदि हिमालय को नुकसान हुआ तो इसका असर दुनिया पर भी पड़ेगा। ग्लोबल वार्मिंग के कारण कितने ही प्रकार के असंतुलन देखने को मिले हैं और आगे भी इसके खतरनाक नतीजे सामने आ सकते हैं।

ये विचार दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कांफ्रेंस सेंटर में आयोजित पहले हिमालय सम्मेलन में डीयू के प्राध्यापक और इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोरिसोर्सेज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक प्रो. दीनबंधु साहू ने व्यक्त किए। साहू ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से सीधा नुकसान हो रहा है। हमारा मकसद सबको एक मंच पर लाना है। हम इसमें वैज्ञानिकों और NGO को एक साथ मंच पर लाए हैं। हम यहां पर हिमालय की समस्या के समाधान में विज्ञान और तकनीक के प्रयोग पर भी विचार कर रहे हैं। हिमालय को बचाने की लड़ाई वहां के लोगों की ही नहीं, बल्कि उनकी भी है जो हिमालय को भोग रहे हैं।

हिमालय के सात फीसद से अधिक लोग अपने संसाधनों का उपयोग नहीं करते, इसका उपयोग मैदानी इलाके के लोग ही करते हैं। हमारा मानना है कि जो भोगे वह उसे बचाने के लिए प्रयास भी करे, लेकिन मैदान के लोगों ने हिमालय को बचाने के लिए अब तक कोई महत्वपूर्ण योगदान नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि विकास और पारिस्थितिकी के बीच भी एक नियंत्रण रेखा होनी चाहिए। हम अगले पांच साल में क्या विकास करना चाहते हैं यह तय हो जाए क्योंकि जिस गति से हम विकास कर रहे हैं उससे हम हिमालय को बर्बाद कर रहे हैं।

यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोरिसोर्सेज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट, डीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बॉयोरिसोर्सेज टेक्नोलॉजी तथा हिमालयन एन्वायरमेंट स्टडीज एंड कंजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

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