'धर्म बदला तो नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ..', इस राज्य में धर्मान्तरण पर सख्त कानून

शिमला: देश में लगातार धर्मांतरण के मामले सामने आ रहे हैं। धर्मांतरण के इन मामलों में जबरन धर्मांतरण, धोखाधड़ी के साथ धर्मांतरण और लालच देकर धर्मांतरण कराने जैसे मामले आम हैं। पूरे देश में जिस प्रकार से अवैध धर्मांतरण का कुचक्र चल रहा है, इसे लेकर हर कोई चिंतित है। इस पर लगाम लगाने को लेकर विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा अपने-अपने हिसाब से सख्त कानून बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में, हिमाचल प्रदेश की जयराम ठाकुर सरकार ने राज्य में धर्मांतरण के मौजूदा कानून में संशोधन करने के उद्देश्य से ‘हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022’ पेश किया है।

हिमाचल प्रदेश के मौजूदा धर्मांतरण कानून की बात करें तो, यहाँ हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2019 को 21 दिसंबर 2020 को ही नोटिफाई कर दिया गया था। इस बिल को 2006 के धर्मांतरण कानून में परिवर्तन लाने के उद्देश्य से पारित किया गया था। दरअसल, वर्ष 2006 के हिमाचल प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून पर 2012 में हिमाचल उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए रोक लगा दी कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। इसके बाद, वर्ष 2019 में राज्य सरकार ने 2006 के कानून में 10 संशोधन करते हुए पुनः विधेयक पेश किया था, जिसे दिसंबर 2020 में कानून की शक्ल में पारित किया गया था।

हिमाचल की जयराम सरकार द्वारा पेश किए गए ‘धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022’ में पिछले कानून की तुलना में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। जयराम ठाकुर सरकार द्वारा पेश नए संशोधन विधेयक में बलपूर्वक धर्मांतरण के लिए जेल की सजा को 7 वर्ष से बढ़ाकर अधिकतम 10 वर्ष तक करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, विधेयक में प्रस्तावित प्रावधान के अनुसार, धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत की गई तमाम शिकायतों की जाँच उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) से निचले दर्जे का कोई पुलिस अधिकारी नहीं कर सकेगा। इतना ही नहीं, इस मामले की पूरी सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी।

जयराम ठाकुर सरकार द्वारा पेश किए गए इस संशोधन विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी करने के लिए अपने धर्म को छिपाता है, तो दोषी व्यक्ति को कम से कम 3 वर्ष की जेल हो सकती है। साथ ही इस सजा को 10 साल तक बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, विधेयक में, न्यूनतम जुर्माना 50000 रुपए कर दिया गया है, जिसे 100000 रुपए तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही धर्मान्तरण करने के बाद आरक्षण का लाभ भी नहीं मिलेगा, यानी अगर अनुसूचित जाति या जनजाति या OBC वर्ग के लोग अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो इसके बाद उन्हें किसी प्रकार का आरक्षण नहीं मिलेगा। 

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