अनुकंपा नियुक्ति को लेकर विवाहित बेटी के पक्ष में कोर्ट ने सुनाया फैसला

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम निर्णय में कहा है, कि यदि विवाहित बेटा अनुकंपा नियुक्ती का हक रखता है, तो विवाहित बेटी को इस अधिकार से दुरी नहीं किया जा सकता. उच्च न्यायालय ने मृतक कर्मचारी की विवाहित बेटी को एक महीने में नौकरी पर रखने के पंजाब सरकार को निर्देश दिए है. 

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मृतक कर्मचारी की पुत्री अमरजीत कौर ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. जिसमें उन्होने बताया कि 2004 में उसका विवाह हुआ था. लेकिन वह अपने पति व बच्चों को लेकर अपने माता पिता के साथ रह रही थी. याचिकाकर्ता ने कहा कि वह अपने माता पिता की इकलौती संतान थी. इसलिए सेवा के मकसद से ऐसा कर रही थी.

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विदित हो कि पूरे परिवार में उनके पिता कमा कर लाते थे. वह पंजाब पुलिस में कार्यरत थे. 2008 में ड्यूटी के समय दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई. जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अनुकंपा के अनुसार नौकरी के लिए आवेदन कर दिया था. 2009 में तरनतारन सीआईडी की ओर से रिपोर्ट देते हुए बताया गया कि परिवार के पास आमदनी का कोई माध्यम उपलब्ध नही है. उनके पास केवल 1 एकड़ खेती की है. लेकिन फिर भी 15 अप्रैल 2015 को पंजाब के डीजीपी ने आवेदन को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि, विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ती नहीं मिल सकती. इस निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद बेटी के पक्ष मे फैसला सुनाया है. क्योंकि संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है.  

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