अंधविश्वास के चलते 700 सालों से यहाँ की महिलाएं नहीं रखती करवा चौथ का व्रत

हमारे देश ने आज चाहे जितनी भी तरक्की कर ली हो लेकिन आज भी हमारे देश के कई हिस्सों में अंधविश्वास को ख़त्म नहीं कर पाये है। आज भी ऐसे कई पुराने रीती रिवाजो के चलते कई मान्यताओं को ख़त्म कर दिया है। जिसे हम हर्षोउल्लास के साथ मानते है। इसे आप अंधविश्वास भी कह सकते है या फिर डर भी कह सकते है जिसके चलते हमारे देश के कई गांव में बीते कई सालो से करवा चौथ नहीं मनाया जाता है। यह परम्परा कई सालो से चली आ रही है। और आज भी यह परम्परा चल रही है जिसके चलते यहाँ की महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत नहीं रख पाती है।

यह घटना है करनाल के गांव कतला हेडी, औन्गद व गोंदर की जहा अंधविश्वास के चलते करवा चौथ का व्रत नही रखती है। हिन्दू सभ्यता में करवा चौथ के व्रत को काफी महत्वता दी जाती है। पत्निया अपने पति की लम्बी उम्र के लिए भूखी प्यासी रहकर इस व्रत को करती है। लेकिन पुराने रीतिरिवाज कहो या अंधविश्वास के चलते इन गांव में करवा चौथ का व्रत नहीं रखा जाता। कतला हेडी, औन्गद व गोंदर गाँव में रहने वाले शत्रिय समाज से मिली जानकारी के अनुसार बीते कई सालो से इन गांव में शत्रिय समाज के चौहान गोत्र में यह त्यौहार नहीं मनाया जाता है। यह उनकी पुरानी परपरा है जो सदियों से चली आ रही है। 

गांव में रहने वाले बुजुर्गो ने बताया की करीब 700 साल पहले उनके पूर्वज महाराज बिरजू सिंह का विवाह कैथल के राहडा गांव में हुआ था। कुछ समय बीत जाने पर उनकी पत्नी मायके चली गई जहा उन्हें स्वप्न आया की उनकी पति मई मत्यु हो गई है जब सुबह उन्होंने सारा वृतांत परिजनों को सुनाया तो उन्होंने वह जाने का निश्चय किया और देखा की स्वप्न सही हुआ और उनके पति की मृत्यु हो चुकी थी। जो की उनकी पत्नी पतिव्रता थी जो वे अपने पति की चिता में बैठ कर सती हो गई। दुर्भाग्यवश वह दिन करवा चौथ का था। जिस कारण वहा की महिलाएं 700 साल पहले से करवा चौथ का व्रत नहीं रखती है।

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