भारी स्कूल बैग से आपके बच्चे में हो सकती है बैकपेन की समस्या

सुबह -सुबह हर घर में बच्चे स्कूल के लिए तैयार होकर अपनी बस या ऑटो का इंतज़ार करते देखे जा सकते हैं. एक चीज हम नहीं देख पाते और वो है उनके नाजुक कंधो पर लदा हुआ बैग रुपी भार. 13 वर्ष की आयु वर्ग के 88 फीसदी छात्र अपनी पीठ पर अपने वजन के 45 फीसदी से अधिक भार ढोते हैं, जिनमें आर्ट किट, ताइक्वांडो के उपकरण, तैराकी से संबंधित सामान, क्रिकेट की किट आदि शामिल हैं.

भारी बस्ते ढोने वाले सात से 13 वर्ष के आयुवर्ग के 68 फीसदी स्कूली बच्चे पीठ में हल्के दर्द की समस्या से पीड़ित हो सकते हैं. यह हल्का दर्द बाद में गंभीर दर्द या कूबड़ तक में बदल सकता है. अगर कम उम्र में ही बच्चे के पीठ में दर्द शुरू हो जाता है, तो इस बात की आशंका है कि उसे यह समस्या जीवनभर झेलनी पड़ेगी. अभिभावकों ने शिकायत की कि उनके बच्चे दिन में औसतन 20 से 22 किताबें और सात से आठ पीरियड की कॉपियां लेकर जाते हैं.

क्या है क़ानून - बच्चों पर स्कूल द्वारा थोपे जा रहे इस भार को लेकर एक क़ानून भी है जिसे बाल स्कूली बस्ता अधिनियम, 2006 के रूप में जाना जाता है. इसके अनुसार बस्ते का वजन बच्चे के वजन के 10 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए. किंडरगार्डन और छोटी कक्षाओं को बैग से मुक्त होना चाहिए.

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