राजस्थान HC में निजी स्कूलों की फीस वसूली केस की सुनवाई पूरी, सुरक्षित रखा गया फैसला

जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली के मामले में बुधवार को सभी पक्षों की बहस पूरी हो गई है. इस पर मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महान्ति और जस्टिस सतीश शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार और अन्य की अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान अभिभावक संघ की तरफ से कहा गया कि कोरोना महामारी के संकटकाल के मद्देनज़र राज्य सरकार को फीस वहन करनी चाहिए, जबकि एक अभिभावक ने कहा कि स्कूल खुलने के बाद भी स्कूल संचालकों को ट्यूशन फीस का 30 प्रतिशत ही वसूल करना चाहिए. 

इस पर सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने कहा कि आरटीई एक्ट के तहत निशुल्क शिक्षा के 25 प्रतिशत स्टूडेंट्स के अलावा अन्य विद्यार्थियों की फीस सरकार वहन करने के लिए विवश नहीं है.  अगर सरकार की तरफ से तय की गई फीस से अदालत संतुष्ट नहीं है तो सीए और ऑडिटर अभिभावकों को शामिल करते हुए गठित फीस निर्धारण कमेटी से फीस तय करवाई जा सकती है.

वहीं, विद्याश्रम स्कूल की तरफ से वकील प्रतीक कासलीवाल ने कहा कि स्कूल प्रशासन और अभिभावकों के बीच संतुलन रखना आवश्यक है. देश के अलग-अलग 8 हाईकोर्ट निर्धारित कर चुके हैं कि कोरोना के हालत में भी स्कूल सौ फीसदी ट्यूशन फीस वसूल सकते हैं. वहीं अगर फीस को लेकर कोई विवाद है तो कुल फीस का अस्सी प्रतिशत जा सकता है.

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