शिव और शक्ति को प्रसन्न करने का व्रत है हरतालिका

By Lav Gadkari
Sep 07 2015 09:15 AM
शिव और शक्ति को प्रसन्न करने का व्रत है हरतालिका

हरतालिका तृतीया : जिसका हर विवाहिता और हर कुंवारी युवति को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। यही नहीं यह भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति अगाध श्रद्धा और भारतीय महिलाओं द्वारा पुरूषों के लिए किए जाने वाले त्याग व समर्पण का प्रतीक है। इस दिन का बहुत महत्व बढ़ जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाया जाता है। इस पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने और पति रूप में पाने के लिए वर्षों तपस्या की थी। इस दौरान उन्होंने जंगल में बालू के शिवलिंग का निर्माण कर उसकी आराधना की।

माता पार्वती ने निर्जल - निराहार रहकर और इस साधना के अलावा केवल पत्तों का भक्षण कर व्रत किया था। जिसके बाद उन्हें पति रूप में भगवान शिव प्राप्त हुए थे। भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि जो भी इस व्रत को करेगा उसे अच्छे वर की प्राप्ति होगी और उसके पति की आयु भी दीर्घ होगी। जिसके बाद यह व्रत महिलाओं और कुंवारी युवतियों द्वारा किया जाता है। इस व्रत के दौरान बालू रेत से भगवान शिव, माता पार्वती के प्रतिबिंब का निर्माण किया जाता है।

पूजन के माध्यम से इसमें प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। इसके बाद महिलाओं द्वारा व्रत के साथ ही आराधना की जाती है और रात्रि जागरण किया जाता है। भगवान को आम के पत्ते, चंपक के पत्ते और केवड़ा अर्पित किया जाता है। भगवान को प्रसन्न करने के लिए पूजन के दौरान कई मंत्रों का उच्चारण भी किया जाता है।