विजया एकादशी के दिन भगवान हरी को अर्पित करें यह फूल, मिलेगी सुख-समृद्धि

आप सभी को बता दें कि भगवान श्रीहरि विष्णु को सुगंधित पुष्प अत्यंत अच्छे लगते हैं ऐसे में उनका मोहक श्रृंगार कई तरह के रंग-बिरंगे सुगंधित पुष्पों से किया जाना उचित माना जाता है. कहते हैं उन सभी में से एक परम प्रिय पुष्प उनका हरसिंगार का है. जी हाँ, हरसिंगार का पुष्प श्वेत रंग का होता है और इसकी पत्तियों के मूल में पीले-नारंगी रंग की धारी मानी जाती है इसमें से मोहक सुगंध आती है. कहते हैं इसे पारिजात या हरिश्रृंगार के नाम से भी जाना जाता है. ऐसे में आप सभी को बता दें कि फाल्गुन कृष्ण एकादशी 2 मार्च 2019 को विजया एकादशी मनाई जाती है और इससे पूर्व की एकादशी को विजया एकादशी कहते हैं. शास्त्रों की माने तो इस दिन व्रत करने वाले को धन-धान्य, संपत्ति, सुख, वैभव सब कुछ मिल जाता है.

हरसिंगार की शास्त्रीय मान्यता - आप सभी को बता दें कि शास्त्रों के अनुसार हरसिंगार वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई है, जिसे देवराज इंद्र ने अपने उद्यान में लगाया था और हरिवंशपुराण के अनुसार श्रीकृष्ण इस दिव्य वृक्ष को स्वर्ग से धरती पर लाए थे और जब वे परिजात का वृक्ष ले जा रहे थे तब देवराज इंद्र ने इसका विरोध किया और वृक्ष को श्राप दे दिया कि इसके फूल दिन में नहीं खिलेंगे.

कहते हैं हरिवंशपुराण के अनुसार ही यह वृक्ष दिव्य कहा गया है और समस्त कामनाओं की पूर्ति करने वाला माना जाता है इस वृक्ष को घर में लगाते ही धन-धान्य से घर भर जाता है और घर में केवल लाभ ही लाभ होता है. ऐसे में अगर आप इस पेड़ को घर में लगाने के बारे में सोच रहे हैं तो फाल्गुन कृष्ण एकादशी 2 मार्च 2019 को लगाए तो आपको लाभ होगा.

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