गुरु नानक देव ने दिया था हिंदुस्तान को हिंदुस्तान नाम!

एक गुरु पूरे जीवन को बदल देता है। गुरु ही है जो एक गिरते हुए बच्चे को उठाता है और सोते बच्चे को झकझोर कर जगाता भी है। अब आज गुरु नानक देव जी की पुण्यतिथि है। गुरु नानक देव जी ने एक ऐसे विकट समय में जन्म लिया जब भारत में कोई केंद्रीय संगठित शक्ति नहीं थी। कहा जाता है उस समय विदेशी आक्रमणकारी देशवासियों का मानमर्दनकर देश को लूटने में लगे थे। वहीं धर्म के नाम पर अंधविश्वास और कर्मकांड चलता था और विदेशी संस्कृति का हमला इस देश की संस्कृति पर हो रहा था।

आप सभी को बता दें कि कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन 1469 को राएभोए के तलवंडी नामक स्थान में, कल्याणचंद (मेहता कालू) नाम के एक किसान के घर गुरु नानकदेवजी का जन्म हुआ था। वहीं उनकी माता का नाम तृप्ता था। 13 साल की उम्र में उनका उपनयन संस्कार हुआ। कहते हैं 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह सुलखनी से हुआ। वहीं साल 1494 में श्रीचंद और लक्ष्मीचंद नाम के दो पुत्र भी इन्हें हुए। वहीं साल 1499 में उन्होंने अपना संदेश देना शुरु किया और यात्राएं प्रारंभ कर दी। उस समय वह 30 साल के थे। साल 1507 में वह अपने परिवार को छोड़कर यात्रा के लिए निकल पड़े। वहीं साल 1521 तक उन्होंने भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब के प्रमुख स्थानों का भ्रमण किया। कहा जाता है उन्होंने चारों दिशाओं में भ्रमण किया था और लगभग पूरे विश्व में भ्रमण के दौरान नानकदेव के साथ अनेक रोचक घटनाएं घटित हुईं।

कहा जाता है नानकदेवजी से ही हिंदुस्तान को पहली बार हिंदुस्तान नाम मिला। जी दरअसल लगभग 1526 में जब बाबर द्वारा देश पर हमला करने के बाद गुरु नानकदेवजी ने कुछ शब्द कहे थे तो उन शब्दों में पहली बार हिंदुस्तान शब्द का उच्चारण हुआ था- ''खुरासान खसमाना कीआ हिंदुस्तान डराईआ।'' वहीं 22 सितंबर, 1539 को गुरुनानक देवजी ने अपना शरीर त्याग दिया।

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