Gully Boy Review : मनोरंजन के लिए देखने जा रहे हैं तो निराशा लगेगी हाथ, बोर कर देगी कहानी

कलाकार : रणवीर सिंह,आलिया भट्ट,कल्कि कोचलिन,विजय राज 

निर्देशक : जोया अख्तर 

मूवी टाइप : Drama,Biography,Musical 

अवधि : 2 घंटा 36 मिनट

रेटिंग : 3.5 / 5 

कहानी : गली बॉय मुंबई के धारावी में रहने वाले मुराद (रणवीर सिंह) की कहानी है. जो गरीबी से ऊपर उठकर कुछ बड़ा करने का सपना देखता है. लेकिन क्या ये नहीं जानता. अपने दर्द और लफ्जों को वो अक्सर नोटबुक में लिखता है. सफीना (आलिया भट्ट) मुराद की गर्लफ्रेंड है. जो अच्छे खानदान से ताल्लुक रखती है. दोनों के स्टेट्स में जमीन-आसमान का फर्क है, इसलिए उनका रोमांस चोरी छिपे चलता है. कहानी में मोड़ तब आता है जब इस बीच मुराद के पिता शाकिर (विजय राज) दूसरा निकाह करते हैं. दूसरी अम्मी के आने के बाद अपनी मां की दयनीय हालत देखकर मुराद दुखी रहता है. वो पिता से डरता है और उनकी हर बात को सिर झुकाकर मानता है.

इसी के बाद मुराद की जिंदगी में यूटर्न मशहूर रैपर एमसी शेर (सिद्धांत चतुर्वेदी) की एंट्री होने के बाद होती है. एमसी शेर मशहूर रैपर है. मुराद भी एमसी शेर की तरह बनना चाहता है. वे उससे रैप की ट्रेनिंग लेता है. इस बीच पिता के बीमार होने की वजह से मुराद को घर की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है. वो पिता की जगह ड्राइवरी का काम करता है. म्यूजिक प्रोग्रामर स्काई (कल्कि कोचलिन) मुराद और एमसी शेर को गाने का ऑफर देती है. ये गाना सनसनी मचा देता है. इसी के बाद मुराद की लाइफ का अहम मकसद शुरू होता है. अब कैसे बनता है मुराद एक रैपर देखिये फिल्म में.

एक्टिंग

फिल्म में रणवीर रणवीर सिंह की एक्टिंग देखकर आप रोमांचित हो जाएंगे क्योंकि ये रोल उन पर फिट लगेगा. वहीं आलिया भट्ट की एक्टिंग भी काबिले तारीफ है. सफीना के रोल में आलिया ने यह साबित कर दिया है कि भले ही कहानी सिंपल क्यों न हो लेकिन अभिनय से फिल्म की काया बदली जा सकती है. कल्कि कोचलिन ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है. सिद्धांत चतुर्वेदी इस फिल्म के सरप्राइज पैकेज है. फिल्म 'गली बॉय' से सिद्धांत ने अपने करियर की शानदार शुरुआत की है. 

क्यों देखें 

* रणवीर सिंह और आलिया भट्ट की एक्टिंग
* फिल्म का गाना भी लाजवाब है. 
* फिल्म का डायलॉग्स
* जोया अख्तर का बेहतरीन निर्देशन
* फिल्म के सारे गाने, कहानी से जुड़े हुए हैं और कोई भी जगह, कोई भी रैप, फिल्म को बोझिल नहीं होने देता है. 

क्यों ना देखें 

गली बॉय की कहानी बेहद सिंपल और सरल है. शायद यही इसके कमजोर होने की बड़ी वजह भी बनी है.अगर आप थियेटर एंटरटेनमेंट के बारे में सोचकर जाएंगे तो यकीनन ही निराश होकर लौटेंगे. फिल्म काफी लंबी है. फर्स्ट हाफ बोर करता है. सेकंड हाफ धीरे-धीरे स्पीड पकड़ता है, लेकिन बीच में कहानी फिर स्लो हो जाती है. गली बॉय का क्लाइमेक्स निराशाजनक है. कहानी में दम नहीं है.

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