गुजरात दंगा: हिंसा पीड़ितों के नाम पर फंड जुटाकर खुद खा गई तीस्ता सीतलवाड़, करीबी ने किया खुलासा

नई दिल्ली: साबरमती एक्सप्रेस में सवार कारसेवकों को गुजरात में जिंदा जलाकर मार दिए जाने के बाद पैदा हुए आक्रोश की वजह से गुजरात में भड़की हिंसा को अपने स्वार्थ में भुनाने वाली कथित समाजिक कार्यकर्ता तीस्ता जावेद सीतलवाड़ की कहानी अब सारी परतें उघाड़ते हुए सामने आ रही हैं। अब तीस्ता से एक करीबी ने बताया है कि उन्होंने हिंसा पीड़ितों के साथ किस तरह धोखा किया है। उधर, तीस्ता की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कांग्रेस ने सोमवार (27 मई 2022) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया है।

कभी सीतलवाड़ के बेहद खास रहे रईस खान ने बताया है कि तीस्ता की गिरफ्तारी उसी वक़्त हो जानी चाहिए थी, जब उन्होंने तीस्ता द्वारा की जा रही धोखेबाजी की शिकायत की थी। खान ने कहा कि तीस्ता जैसे लोग पीड़ितों के नाम पर पैसा इकठ्ठा करते हैं और खुद खा जाते हैं। ऐसे लोगों को माफ नहीं किया जाना चाहिए। रईस खान ने आगे कहा कि हिंसा पीड़ितों के नाम पर तीस्ता ने देश और विदेश से करोड़ों रुपए का फंड जुटाया और इसका एक प्रतिशत पर पीड़ितों को नहीं दिया। खान ने कहा कि इसी बात को लेकर तीस्ता के साथ वर्ष 2008 में उनका विवाद भी हो गया था और इसके बाद वे उनसे अलग हो गए थे।

रईस खान ने बताया है कि 1992 में मुंबई दंगों के दौरान तीस्ता न्यूज पेपर में रिपोर्ट किया करती थीं। उसी दौरान उनकी तीस्ता से मुलाकात हुई थी। इसके बाद तीस्ता ने त्यागपत्र देकर कॉम्बैक्ट न्याय मंच नाम से एक NGO बनाया था। इसमें उन्होंने तीस्ता की सहायता की थी। दंगों के बाद दोनों का संपर्क खत्म हो गया। रईस खान ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वर्ष 2002 के गुजरात हिंसा के दौरान तीस्ता ने उनसे संपर्क किया और हिंसा पीड़ितों की मदद के नाम पर सहायता माँगी। रईस के मुताबिक, उन्होंने तीस्ता को नरोदा पाटिया, सरदारपुर आदि कई गाँवों के हिंसा पीड़ितों से मिलवाया। रईस के अनुसार, तीस्ता ने पीड़ितों के नाम पर फंड इकठ्ठा किया और उनके नाम पर एफिडेविट बनाकर SIT और नानावटी कमीशन के समक्ष पेश किया। रईस का दावा है कि इस हलफनामे में क्या लिखा था, यह पीड़ितों को भी नहीं पता था। जब हलफनामे और बयान में विरोधाभास दिखा, तब जाकर मामले का खुलासा हुआ।

रईस के मुताबिक, जब पीड़ितों को फंड देने की बात कही तो तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा कि, 'मैंने कहा आप जिनके नाम पर फंड ला रही हैं, उन्हें तो पैसा दे दीजिए। तब तीस्ता ने कहा कि बडी मुश्किल से मुझे फंड मिलता है और उसमें से भी 50 फीसद फंड दिलाने वाले एजेंट ले जाते हैं। ऐसे में जो बचता है, उसमें कहाँ से मैं दूँगी, मेरे भी तो खर्चे हैं।' रईस खान का कहना है कि डोनेशन में हेरफेर को लेकर उन्होंने तीस्ता के खिलाफ शिकायत की थी, मगर तीस्ता के सियासी रसूख बहुत अधिक थे और पुलिस में भी उनकी काफी ऊँची पहुँच थी। इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालाँकि, गुजरात मामले में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद तीस्ता को अरेस्ट कर लिया गया।

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