राष्ट्रपति के पास होगा भी लोकायुक्त संगठन से जुड़ा विधेयक

लखनऊ: जानकारी के अनुसार राज्यपाल राम नाईक ने उप्र लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक 2015 को भारत का संविधान के अनुच्छेद 254 (2) के अंतर्गत राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करते हुए राष्ट्रपति को संदर्भित कर दिया है. राज्यपाल ने इस आशय की जानकारी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी दे दी है. मालूम हो कि राज्यपाल ने गुरुवार को भी नगर निगम से संबंधित दो विधेयकों को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को संदर्भित किया था।

चीफ जस्टिस की भूमिका नहीं राज्यपाल ने विधेयक के परीक्षण के बाद कहा कि विधानमंडल से पारित संशोधित विधेयक में लोक आयुक्त की चयन प्रक्रिया से इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की भूमिका को समाप्त कर दिया गया है, जबकि केन्द्रीय अधिनियम में लोकपाल के चयन में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की भूमिका महत्वपूर्ण है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की भूमिका को लोक आयुक्त चयन प्रक्रिया से समाप्त करने से केन्द्रीय अधिनियम लोकपाल तथा लोक आयुक्त अधिनियम, 2013 की धारा- 4 की उपधारा (1क्) के विरोधाभासी प्रतीत होता है. इस दृष्टि से राज्यपाल ने इसको राष्ट्रपति को संदर्भित करने का निर्णय लिया है. अब इस विधेयक पर राष्ट्रपति विचार करेंगे।

लोकायुक्त चयन में भी आई थी बाधा उपरोक्त विधेयक की वजह से प्रदेश में लोकायुक्त के चयन में बाधा भी आ चुकी है। लोकायुक्त चयन के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने केन्द्रीय अधिनियम का हवाला देते हुए राज्य सरकार को पहले विधिक राय लेने को कहा था। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया और पुराने अधिनियम के तहत लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा की तैनाती लोकायुक्त पद पर की गयी।

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