हर कॉमेडी मूवी के किरदार में खो जाते है गोवर्धन असरानी

हिंदी सिनेमा में जहां भी कैदियों और जेलर का दृश्य आता है दर्शकों के स्मृति पटल पर केवल एक ही चेहरा छा जाता है। जानी, हम अंगरेजों के ज़माने के जेलर हैं, हा हा। शायद मूवी शोले के इस संवाद को पढ़कर आपको इनका नाम याद आ जाए। जी हां, बाॅलीवुड में हास्य अभिनेता के तौर पर असरानी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। हास्य एक बहुत जटिल काम है, सिनेमा के दर्शकों को हास्य के रस में सराबोर करना ठीक वैसा ही है जैसे किसी रोते हुए बच्चे को बहलाना और हंसाना है। वहीं आज असरानी अपना 81वां जन्मदिन मना रहे है। 

दूसरी ओर हास्य फूहड़ता से बेहद अलग है। यदि कहा जाए कि असरानी हास्य की रियलिटी के किंग हैं तो कुछ गलत नहीं होगा। इस हास्य अभिनेता ने तकरीबन पांच दशक तक दर्शकों को अपने फन की मदहोशी में बांधे रखा। 1 जनवरी 1941 को जयपुर में जन्मे असरानी अभिनेता का ख्वाब लेकर 1963 में मुंबई पहुंचे। जहां उनकी भेंट किशोर साहू और ऋषिकेश मुखर्जी से हुई।
 
हालांकि यहां से उनकी दिशा पूणे की ओर मुड़ गई। दोनों के कहने पर असरानी फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पूणे में दाखिला लेने पहुंचे। असरानी का दाखिला हुआ। अपना प्रशिक्षण पूरा कर उन्होंने मुंबई की ट्रेन पकड़ ली। यहाँ शुरूआती दिनों में उन्होंने पूना के फिल्म इंस्टीट्यट से अपना एक्टिंग कोर्स पूरा किया. इन्हे पहला चांस विश्वजीत के साथ फिल्म हरे कांच की चूड़ियाँ से की थी। असरानी ने बॉलीवुड में कई सारी हिट फिल्मो में काम किया। जिनमे शोले , जोकर, भूल भुलैया, माला माल वीकली, चुप चुप के. चुपके चुपके, धमाल, हलचल, दूल्हे राजा और क्योकि जैसी फिल्मे शामिल है।

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