12 साल की उम्र से ही मैं मैन्डोलिन बजाने लगा था.......

बॉलीवुड के दिग्गज बेस गिटार वादक गोरख शर्मा जिन्होंने कि साल 1980 में आई फ़िल्म 'कर्ज़' के मशहूर तराने 'एक हसीना थी, एक दीवाना था' का तर्ज़ बनाया. अपने एक बयान में गोरख शर्मा का कहना है कि संगीत की दुनिया में इंसानो की जगह मशीनों ने ले ली है. हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री को बेस गिटार की सौग़ात देने वाले गोरख शर्मा मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के प्यारेलाल के छोटे भाई हैं. इंडस्ट्री के वर्तमान दौर को गोरख 'मशीनी' बताते हुए कहते हैं, '' संगीत की दुनिया में इंसानो की जगह मशीनों ने ले ली है.'' जब उनसे पूछा गया कि बड़े भाई की तरह उन्होंने संगीत निर्देशन में हाथ क्यों नहीं आजमाया?

इसके जवाब में वे कहते है, "मैं उन दिनों मैन्डोलिन और गिटार की परफार्मेंस और उनकी रिकॉर्डिंग में इतना व्यस्त रहता था कि संगीत निर्देशन के लिए वक़्त ही नहीं मिल पाता था."

गोरख बताते हैं कि 12 साल की उम्र से ही मैं मैन्डोलिन बजाने लगा था. यहां तक कि मैं संगीतकार और गायक हृदयनाथ मंगेशकर (लता मंगेशकर के भाई) के शोज़ में मैन्डोलिन बजाता था. इस तरह से देखा जाए तो मशहूर बेस गिटार वादक गोरख शर्मा ने अपने इस शानदार हुनर के चलते बॉलीवुड में अपनी एक अलग ही इमेज स्थापित की.   

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