एक पैर के बिना देश को दिया गोल्ड मेडल, महिला के हौसले से युवापीढ़ी को मिली बड़ी सीख

आज हम आपको एक ऐसी महिला के जीवन की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिनके बारे में आप सुन कर गर्व महसूस करेंगे. एक सच्चा प्लेयर वही हैं जो कभी हार न माने जब हम अपने काम के प्रति सच्ची श्रद्धा के साथ आगे बढ़ते हैं.तो बेशक ही मंजिल मिलती ही हैं. दिल से गेम खेलने वाला खिलाड़ी कभी हार नहीं मनाता हैं ऐसी ही एक खिलाडी की बात आज हम करने जा रहे हैं जिनका नाम मानसी जोशी हैं. साल 2019 पैरा वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप हुआ था जिसमें उन्होंने भारत को 12 पदक जितवाए हैं जिसमें एक गोल्ड भी शामिल हैं. कहानी यही खतम नहीं होती हैं. कहानी तो अभी शुरू हुई हैं .

गोल्ड जीतने से पहले इंसान को गोल्ड बनना पड़ता है यदि बात कि जाये तो अभी मानसी टोक्यो पैरालंपिक्स की तैयारी में जुटी हुई हैं. जो इसी वर्ष अगस्त में होने वाले हैं. 2011 में एक सड़क हादसे में मानसी ने अपना बायां पैर खो दिया था और एक इंटरव्यू में कहा कि वो 12 घंटे तक ओटी (ऑपरेशन थिएटर) में रहीं थी. और फिर डॉक्टर्स को उनका पैर कटाना पड़ा. इस हादसे के पश्चात 50 दिन उनके अस्पताल में बिताने पड़े थे. महाराष्ट्र की रहने वाली मानसी में बचपन से ही बैडमिंटन खेलने का शौक रहा है और उनके पिता ‘भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर’ में थे. वही मानसी पढ़ाई के दर्मिया ही जिला स्तर पर बैडमिंटन खेल चुकी थीं. उनका गेम सुधरता जा रहा था. लेकिन 2011 में हुए हादसे के पश्चात् उनका पूरा जीवन ही परिवर्तित हो गया और हादसे के पश्चात् अस्पताल पहुंचने में उन्हें 3 घंटे लग गए थे.और उनका हाथ में फ्रैक्चर था और 10 घंटों तक ऑपरेशन हुआ. इसके बाद उनका बायां पैर डॉक्टर्स को काटना पड़ा. सड़क हादसे के पश्चात् वो अस्पताल में भी अपने गेम के बारे में सोचती रहती थी.

मानसी ने ये भी कहा कि, ‘उस समय मैं केवल यही सोच रही थीं कि एक पैर ही तो गंवाया है, लेकिन में दौड़ने लायक नहीं रही, तो भी कोई बात नहीं. और यही सोच ने उनके जीवन को परिवर्तित कर दिया. मानसी ने हादसे के चार महीनों पश्चात् ही फिर मैदान में थी. और उन्होंने कृत्रिम पैर लगवा लिया था और पूरे उम्मीद और हौसले के साथ आगे बढ़ने लगी. और 2014 तक मानसी फिर से फॉर्म में थी यह दोबारा पेशेवर खिलाड़ी बन चुकी थीं. आखिर मानसी का समय आ चुका था खुदको साबित करने का 2017 में कोरिया में हुई विश्व चैंपियनाशिप में उन्होंने कांस्य जीता. इसके बाद बीडब्ल्यूएफ पैरा वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता. इस साल मानसी का लक्ष्य टोक्यो पैरा ओलंपिक्स में जीत हासिल करना का है. और उनके इस हौसलों ने हम सब का दिल जीत लिया. हम सभी उनके लिए दुआ करते हैं कि उनको सफलता हासिल हो. और हम सब उनके इस हौसले को सलाम भी करते हैं.

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