आज जरूर करें देवी कूष्मांडा के ध्यान मंत्र और पूजा मंत्र का जाप

Mar 28 2020 06:20 AM
आज जरूर करें देवी कूष्मांडा के ध्यान मंत्र और पूजा मंत्र का जाप

आप सभी जानते ही है कि हर साल नवरात्र का पर्व मनाया जाता है. ऐसे में इस साल  नवरात्र का पर्व मनाया जा रहा है और आज नवरात्र का चौथा दिन है. आप सभी को बता दें कि नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना की जाती है. कहा जाता है इनकी उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है. इसी के साथ देवी कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है. कूष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़ा यानी कद्दू. आप सभी को बता दें कि देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप को कुम्हड़े की बलि ज्यादा प्रिय है. इसलिए इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है. तो आइए जानते हैं आज माँ के ध्यान मंत्र, पूजा मंत्र और पूजा का महत्व.

ध्यान मंत्र -
सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च.
दधानाहस्तपद्याभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
अर्थ आठ भुजाओं वाली कूष्मांडा देवी अष्टभुजा देवी के नाम से भी जानी जाती हैं. इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमलपुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा रहते हैं. देवी कूष्मांडा का वाहन सिंह है.

पूजा का मंत्र -
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:..

पूजा का महत्व- कहा जाता है देवी कूष्मांडा भय दूर करती हैं. इसी के साथ जीवन में सभी तरह के भय से मुक्त होकर सुख से जीवन बीताने के लिए ही देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है. कहते हैं देवी कूष्मांडा की पूजा से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है केवल इतना ही नहीं बल्कि इनकी पूजा से हर तरह के रोग, शोक और दोष दूर हो जाते हैं. कहते हैं इनकी पूजा से किसी तरह का क्लेश भी नहीं होता है और देवी कूष्मांडा को कुष्मांड यानी कुम्हड़े की बली दी जाती है. इसकी बली से हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती है. आप सभी को बता दें कि कूष्मांडा देवी की पूजा से समृद्धि और तेज प्राप्त होता है. इनकी पूजा से जीवन में भी अंधकार नहीं रहता है.

ज्योतिष के अनुसार जानिए कब खत्म होगा कोरोना का प्रकोप?

नवरात्रि में नौ दिन अलग-अलग रंगों के परिधान का है यह महत्त्व

Navratri 2020: नवरात्रि देवी में दुर्गा के नौ मंत्रों से पूर्ण होगी सभी मनोकामनाएं