करन जौहर को पीटो, मेरे पीछे क्यों पड़े हो: वीके सिंह

Jan 23 2016 07:39 PM
करन जौहर को पीटो, मेरे पीछे क्यों पड़े हो: वीके सिंह

जोधपुर: जयपुर में चल रहे लिटरेचर फेस्टिवल में निर्माता-निर्देशक करण जौहर ने भी लोकतंत्र और असहिष्णुता पर अपना मत रखा। इस संबंध में जब विदेश राज्यमंत्री वी के सिंह से पूछा गया तो उन्होने कहा कि उसकी पिटाई कर दो, मेरे पीछे क्यों पड़े हो। जौहर ने कहा था कि भारत में मन की बात कहना सबसे मुश्किल है। साथ ही उन्होने लोकतंत्र का भी मजाक उड़ाया था।

क्या कहा सिंह ने पाक के सवाल पर

सिंह शनिवार को बीजेपी वर्कर्स की एक मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए जोधपुर पहुंचे थे। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे पाकिस्तान के संबंध में सवाल पूछा तो उन्होने कहा कि श्रीकृष्ण ने शिशुपाल को 99 बार माफ किया, लेकिन सौंवी गलती पर उसका काम तमाम कर दिया। पाक का भी यही हश्र होगा। पाकिस्तान के ही सिंध में हिंदुओं को टॉर्चर किए जाने के सवाल पर सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार अपने लेवल पर काम कर रही है। फिर करन जौहर पर एक सवाल पूछा गया तो सिंह ने कहा कि हम यहां करन के बारे में बात क्यों कर रहे हैं? पार्टी के वर्कर्स से बात करने आया हूं। इसलिए जरूरी बातें ही करें।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर

जौहर के बयान के बाद कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार बुद्धिजीवियों के खिलाफ है। देश में हर तरफ तनाव बढ़ रहा है। अनुपम खेर जो सरकार के मोहरे हैं, अगर उनको छोड़ दिया जाए तो हर कलाकार, पेंटर और बाकी आर्टिस्टस कह रहे हैं कि यह सरकार इंटेलेक्चुअल्स के खिलाफ है। कांग्रेस के इस बयान पर बीजेपी नेता महेश शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि पूरी दुनिया देख रही है कि भारत दुनिया का सबसे टॉलरेन्ट देश है। मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जो लोग भारत में इन्टॉलरेन्स का सवाल उठा रहे हैं, उन्हें इस देश के कल्चर और ट्रेडिशन्स की कोई नॉलेज नहीं है।

क्या कहा था जौहर ने

फेस्टिवल में अनसूटेबल ब्वॉय सेशन में शोभा डे से बातचीत के दौरान करन ने कहा कि आप मन की बात कहना चाहते हैं या अपनी निजी जिंदगी के राज खोलना चाहते हैं तो भारत सबसे मुश्किल देश है। मुझे तो लगता है जैसे हमेशा कोई लीगल नोटिस मेरा पीछा कर रहा है। किसी को पता नहीं कब उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो जाए। 14 साल पहले मैंने नेशनल एंथम के अपमान का केस को झेला है। अपना पर्सनल ओपिनियन रखना और डेमोक्रेसी की बात करना, ये दोनों ही मजाक हैं। हम फ्रीडम ऑफ स्पीच की बात करते हैं, पर अगर मैं एक सेलिब्रिटी होने के नाते अपनी राय रख भी दूं तो एक बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी बन जाती है।

रस्किन बॉन्ड ने कहा

अवॉर्ड्स कोई बेजान चीज नहीं, ये लोगों का प्यार है। इसे लौटाना या ठुकराना ठीक नहीं है। जैसे इन्टॉलरेंस इन्टॉलरेंस को जन्म देता है, वैसे ही टॉलरेंस से टॉलरेंस फैलता है। जब आप और मैं तय कर लेंगे कि हमें टॉलरेंट बनना है तो दुनिया बदल जाएगी। लेखक शब्दों से दूरियां पाटने की ताकत रखते हैं, उनकी टॉलरेंस कैपेसिटी ज्यादा जरूरी है।

दरअसल फेस्टिवल में अवॉर्ड लौटाने वाली हस्तियों और इसका विरोध करने वालों को खासतौर पर आमंत्रित किया गया था। ऐसे में असहिष्णुता का मुद्दा उठना लाजिमी है।