बॉलीवुड से ज्यादा साउथ मूवीज में अपने अभिनय के लिए आज भी याद किए जाते है गिरीश

फिल्मों में दिलचस्पी रखने वाले लोग गिरीश कर्नाड को सिर्फ एक एक्टर के तौर पर ही पहचानते थे। कम ही लोगों को ये पता था कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। गिरीश कर्नाड ना सिर्फ एक एक्टर थे बल्कि वो उम्दा नाटककार, लेखक और प्रतिभावान निर्देशक भी रह चुके है। गिरीश कर्नाड का जन्म आज ही के दिन यानि 19 मई, 1938 में हुआ था। गिरीश महाराष्ट्र के उस माथेरान में जन्मे जहां आज भी मोटरगाड़ी से पहुंचना नामुमकिन है। तो चलिए जानते हैं गिरीश कर्नाड से जुड़ी कुछ और खास बातें...

गिरीश कर्नाड की शुरुआती पढ़ाई मराठी स्कूल में भी पूरी हुई थी। वर्ष 1958 में कर्नाटक आर्ट्स कॉलेज से उन्होंने अपना ग्रेजुएशन कर लिया था। उनके लिखे नाटकों में 'ययाति', 'तुगलक', 'हयवदन', 'अंजु मल्लिगे', 'अग्निमतु माले', 'नागमंडल' और 'अग्नि और बरखा' बहुत प्रसिद्ध रहे हैं। गिरीश कर्नाड ने साल 1970 में कन्नड़ मूवी से अपने मूवी सफर की शुरुआत कर दी थी। उन्हें दूरदर्शन पर प्रसारित किए जाने वाले मशहूर शो मालगुड़ी डेज में स्वामी के पिता की भूमिका के लिए आज भी उनके फैंस उन्हें याद करते है। उनकी मशहूर कन्नड़ मूवी तब्बालियू मगाने, ओंदानोंदु कलादाली, चेलुवी, कादु और कन्नुड़ु हेगादिती रही हैं। 

गिरीश कर्नाड ने एक बार बोला था, 'मैं कवि बनना चाहता था लेकिन मेरी थिएटर में भी रुचि थी, मेरा नाटक लेखक बनने के बारें में कभी नहीं सोचा था। स्कॉलरशिप मिलने के उपरांत मैं लंदन पहुंचा। उस समय एक धारणा थी कि यदि मैं विदेश जाऊंगा, तो मैं विदेश की किसी गोरी मेम से विवाह कर लूंगा। तभी एक दिन मेरे मन में ययाति लिखने का विचार आया। जिसके उपरांत जिंदगी में कई मोड़ आए।' उन्होंने बोला था कि नाटकों के लेखन-निर्देशन, अभिनय के अलावा फिल्म निर्देशन में भी आया। 

गिरीश कर्नाड ने हिंदी मूवी में भी अपना हाथ अजमाया और इसमें भी कामयाबी पाई। हिंदी में उन्होंने 'निशांत', 'मंथन' और 'पुकार' जैसी मूवीज कीं। जिसके साथ साथ सलमान खान के साथ वो 'एक था टाइगर' और 'टाइगर जिंदा है' में भी नजर आए थे, यही उनकी आखिरी हिंदी मूवी भी थी। उनकी आखिरी फिल्म कन्नड़ भाषा में बनी 'अपना देश' थी। साल 2019 में 10 जून को प्रतिभावान गिरीश कर्नाड ने इस दुनिया को अलविदा बोल दिया। 48 वर्ष के अपने फ़िल्मी करियर में गिरीश कर्नाड ने 90 से अधिक मूवीज में काम किया। साल 1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1998 में ज्ञानपीठ पुरस्कार, 1974 में पद्मश्री, 1992 में पद्मभूषण पाने वाले गिरीश कर्नाड को अमर उजाला की ओर से आकाशदीप सम्मान दिया जा सकता है।

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