यहाँ गिरे थे मातारानी के दो मणिबंध, दर्शन मात्र से पूरी हो जाती है मनोकामना

नवरात्रि का पर्व चल रहा है और इस पर्व के दौरान माता रानी के नौ रूपों का पूजन किया जाता है। मातारानी के 52 शक्तिपीठ हैं और इन शक्तिपीठों का पूजन सभी करते हैं। इसी लिस्ट में शामिल है राजस्थान के पुष्कर में स्थित गायत्री माता का मंदिर। कहा जाता है पुष्कर में एक माता सती का शक्तिपीठ है, तो दूसरा ब्रह्माजी का प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां पर गायत्री माता भी विराजमान है।

इसके अलावा तीसरा माता सावित्री का मंदिर है। जी दरअसल अजमेर के निकट विश्‍व प्रसिद्ध पुष्करनामक स्थान से लगभग 5 किलोमीटर दूर गायत्री पर्वत पर दो मणिबंध (हाथ की कलाई) गिरे थे इसीलिए इसे मणिबंध स्थान कहते हैं। कहा जाता है इसको मणिदेविक मंदिर भी कहते हैं। इसकी शक्ति है गायत्री और शिव को सर्वानंद कहते हैं। यह शक्तिपीठ मणिदेविका शक्तिपीठ नाम से ज्यादा विख्यात है। इस मंदिर में व्यक्ति अपनी जो भी मनोकामना लेकर आता है वह जल्द पूरी हो जाती है। इसके अलावा एक अन्य मंदिर है। कहा जाता है पुष्कर में ही यज्ञ के दौरान सावित्री के अनुपस्थित होने की स्थित में ब्रह्मा ने वेदों की ज्ञाता विद्वान स्त्री गायत्री से विवाह कर यज्ञ संपन्न किया था।

जी हाँ और ब्रह्माजी ने पुष्कर में कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णमासी तक यज्ञ किया था जिसकी स्मृति में अनादिकाल से यहां कार्तिक मेला लगता आ रहा है। आद्य शंकराचार्य ने संवत्‌ 713 में ब्रह्मा की मूर्ति की स्थापना की थी।यहां पर माता गायत्री की प्रतिमा भी विराजमान है। इसी के साथ पुष्कर में रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित सावित्री माता का प्राचीन मंदिर है। कहा जाता है यह मंदिर भगवान ब्रह्मा की पत्नी देवी सावित्री को समर्पित है।

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