मां के आंचल में सो रही मासूम को छीन, दरिंदो ने की ऐसी हरकत की याद आया निर्भया कांड

सीकर। सीकर में गुरुवार रात एक ऐसी दरिंदगी सामने आई जिससे निर्भया कांड के जख्म फिर से हरे कर दिए। शहर के बीच कल्याण सर्किल पर डिवाइडर पर मां के साथ सो रही 4 साल की मासूम को 2 दरिंदे अगवाह कर ले गए। झाड़ियों के बीच ले जाकर मासूम के ऊपर जानवर की तरह टूट पड़े। दोनों दरिंदो ने बारी बारी से मासूम से सामूहिक ज्यादती की जब इतने से मन नही भरा तो मासूम को कचरे में फेंक गए।

इस दौरान पीडि़ता की मां 4 घंटे तक थाने और चौकियों में मासूम की जिंदगी की भीख मांगती रही लेकिन किसी का कलेजा नही पसीजा। अगर पुलिस समय रहते कार्यवाही करती तो मासूम को दरिंदगी का शिकार होने से बचाया जा सकता था। इतना ही नहीं जब मासूम लहुलुहान हालत में मिली तब भी पुलिस ने इसको गंभीरता से नहीं लिया और एसपी समेत जिम्मेदार आला अधिकारी करीब 5 घंटे बाद मौके पर पहुंचे।

पीड़िता की मां को संदेह है की रामसिंह व बाबूलाल नाम के 2 व्यक्ति इस दौरान आस-पास घूम रहे थे। शक है वहीं बच्ची को उठा ले गए। बयानों के आधार पर पुलिस ने सुबह करीब 10 बजे इन दोनों व्यक्तियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया। जानकारी के मुताबिक मेलों के दौरान बर्तन बेचकर जीविका चलाने वाली उदयपुरवाटी के एक गुजराती बावरी परिवार की महिला गुरुवार शाम तीन बजे राजगढ़ से सीकर आई थी। उसे अपनी मां के पास जीणमाता जाना था। रात को वह अपने 5 बच्चों के साथ कल्याण सर्किल पर बने डिवाइडर पर सो गई। रात करीब 1 बजे वह उठी तो पांचों बच्चे सो रहे थे। इस पर वह किसी काम से थोड़ी दूरी पर चली गई। वहां से वापस आई तो चार साल की बेटी गायब थी।

इस पर उसने रेलवे स्टेशन व आसपास के इलाके में तलाश किया। जब नहीं मिली तो कल्याण सर्किल चौकी में जाकर सूचना दी। पुलिस ने उसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। उसने खुद ही अपने स्तर पर बालिका को तलाश किया। सुबह करीब 7 बजे स्टेशन के पास जमा गंदे पानी के किनारे कचरे के ढेर में मासूम बेहोश मिली। इस पर मां ही उसे एसके अस्पताल लेकर आई। इसके बाद भी न तो पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और न चिकित्सा महकमे ने। दोपहर 1 बजे तक एसके अस्पताल में मासूम दर्द से कराहती रही। इसके बाद उसे जयपुर रैफर किया जा सका।

मासूम बच्ची की मां पुलिस के सामने बिलख बिलख कर फरियाद करती रही लेकिन किसी भी पुलिस कर्मी ने उसकी फरयाद पर कार्यवाही नही की बल्कि उल्टा जवाब दिया की खुद ढूंढ ले। इसपर मां ने खुद अपने स्तर पर बच्ची की तलाश की तो वह बेहोश हालत में कचरे के ढेर पर पड़ी मिली। पीड़िता की मां उसे अस्पताल लेकर गयी लेकिन वहा भी डॉक्टरों की इंसानियत शर्मसार हो गयी। उन्होंने भी मासूम का इलाज करीने की फजीहत नही उठाई। न पुलिस के आला अधिकारी समय पर पहुंचे। जब हद से ज्यादा समय गुजर गया तब महज कुछ पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचे और मासूम को उपचार के लिए जयपुर रैफर किया गया।

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